Study: पहाड़ पर कैसे पहुंच गया किंग कोबरा? बर्फीले इलाकों में जहरीले सांप की आमद से जीव विज्ञानी हैरान
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Study: पहाड़ पर कैसे पहुंच गया किंग कोबरा? बर्फीले इलाकों में जहरीले सांप की आमद से जीव विज्ञानी हैरान
आम तौर पर गर्म वातावरण को पसंद करने वाला कोबरा अब नैनीताल ज़िले के मुक्तेश्वर और अल्मोड़ा जिले के एक गांव में भी देखा गया है.

गर्म वातावरण को पसंद करने वाला किंग कोबरा सांप (The King Cobra) नैनीताल और अल्मोड़ा जैसे स्थानों पर देखा गया. वन विभाग की रिसर्च टीम (Forest Research Team) की रिपोर्ट के मुताबिक 5 साल में 132 बार यह जहरीला सांप उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों में देखा गया है.

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हल्द्वानी. दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में से एक किंग कोबरा (The King Cobra) अब पहाड़ यानी ज्यादा ऊंचाई पर पहुंच गया है. वन विभाग की रिसर्च के मुताबिक यह बिल्कुल नई बात है. आम तौर पर गर्म वातावरण को पसंद करने वाला कोबरा (Ophiophagus Hannah) अब नैनीताल ज़िले के मुक्तेश्वर और अल्मोड़ा जिले के एक गांव में भी देखा गया है. विभाग की रिसर्च विंग की इस रिपोर्ट से जीव विज्ञानी भी हैरान हैं. रिपोर्ट के अनुसार एक जून, 2020 को नैनीताल में मुक्तेश्वर के करीब देवनगर गांव और अल्मोड़ा के सिमरार गांव में 8 अगस्त, 2020 को किंग कोबरा देखा गया.

बदलाव की आहट?

रिसर्च विंग के चीफ कंज़रवेटर आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के मुताबिक दुनिया में पहली बार 2200 से 2400 मीटर की ऊंचाई पर किंग कोबरा दिखाई दिया है. ये ऐसी जगह हैं जहां जाड़ों में जमकर बर्फबारी होती है और सालभर तापमान बेहद कम रहता है. चतुर्वेदी कहते हैं कि यह रिसर्च का विषय है कि गर्म वातावरण में पाया जाने वाला किंग कोबरा ऐसी ठंडी जगहों पर कैसे निवास कर रहा है? मुक्तेश्वर में जहां किंग कोबरा को देखा गया है वहां बर्फ़बारी के सीजन में अच्छी-खासी बर्फ पड़ती है और आम दिनों में भी तापमान तराई या कम ऊंचाई वाली जगहों के मुकाबले बेहद कम रहता है. इसलिए यह शोध का विषय है कि किंग कोबरा के रहन-सहन में कोई बदलाव हुआ है या वातावरण में.



king cobra in hills, नैनीताल ज़िले में जो कोबरा 200 से 400 मीटर की ऊंचाई बसे तराई-भाबर के जंगलों मिलते हैं, वही 2200 से 2400 मीटर में भी मिल रहे हैं.
नैनीताल ज़िले में जो कोबरा 200 से 400 मीटर की ऊंचाई बसे तराई-भाबर के जंगलों मिलते हैं, वही 2200 से 2400 मीटर में भी मिल रहे हैं.

हैरानी की वजह?

चतुर्वेदी नैनीताल जिले में किंग कोबरा की आबादी देख भी हैरान हैं क्योंकि प्रदेश के 62 फीसदी किंग कोबरा अकेले नैनीताल ज़िले में ही हैं. हैरानी की बात यह है कि जिले में मैदान से लेकर पहाड़ तक हर जगह किंग कोबरा दिखा है. नैनीताल ज़िले में जो कोबरा 200 से 400 मीटर की ऊंचाई बसे तराई-भाबर के जंगलों मिलते हैं, वही 2200 से 2400 मीटर में भी मिल रहे हैं.

चतुर्वेदी कहते हैं कि यह बेहद हैरान करने वाली बात है क्योंकि दोनों के तापमान में ज़मीन-आसमान का अंतर है. तराई-भाबर का तापमान जहां 5 डिग्री से लेकर 48 डिग्री तक जाता है, वहीं ऊंचाई वाली जगहों का तापमान माइनस में भी रहता है.

अभी तक यहां मिले हैं कोबरा

अभी तक उत्तराखंड में कई जगह किंग कोबरा देखे चुके हैं. फॉरेस्ट की नैनीताल डिविजन के मनोरा, नैना, उत्तरी गौला और भवाली रेंज में कोबरा मिल चुके हैं. साथ ही कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, कालागढ़ टाइगर रिजर्व, राजाजी टाइगर रिजर्व में भी कोबरा मिले हैं. हल्द्वानी तराई-पूर्वी, रुद्रपुर तराई सेंद्रल, रामनगर के कोसी और कोटा रेंज, हल्द्वानी फॉरेस्ट डिविजन के गौलापार, फॉरेस्ट डिविजन देहरादून , मसूरी, चकराता के कालसी रीवर रेंज, हरिद्वार के हरिद्वार रेंज, लैंसडॉन के कोटद्वार, लालढांग, उत्तरकाशी के उत्तरकाशी, निराकोट रेंज में भी कोबरा देखा गया है.

वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इन इलाकों में साल 2010 से लेकर 2015 के बीच कुल 132 बार कोबरा दिखे हैं. इसमें से राज्य के पांच जिले शामिल हैं. नैनीताल में 83, देहरादून में 32, पौड़ी में 12, उत्तरकाशी में तीन और हरिद्वार में दो बार किंग कोबरा दिखा है.

विश्व में यहां मिलते हैं किंग कोबरा

किंग कोबरा की दुनिया भर में 200 से ज्यादा प्रजातियां मिलती हैं. भारतीय उप महाद्वीप के साथ ही, साउथ एशिया में भी किंग कोबरा देखे गए हैं. भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, बर्मा, कंबोडिया, चीन, इडोनेशिया, लाओस, मलेशिटा, नेपाल, फिलीपींस, सिंगापुर, थाइलैंड, वेतनाम और साउथ तीन में में पाए जाते हैं.

भारत में किंग कोबरा की प्रजातियां उत्तराखंड, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंघ्र प्रदेश, ओडिशा, उत्तर-प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल के उत्तरी इलाकों और अंडमान में देखी जाती हैं. किंग कोबरा को विलुप्त होती प्रजाति का सांप माना गया है.
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