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इस गांव में गीली मिट्टी से बनते हैं पक्के मकान, 'गीली मिट्टी' है संस्था का नाम

गांव

गांव के लोग इन मकानों को गोलघर कहते हैं.

मेहरोड़ा गांव के लोगों ने शगुन सिंह के बनाए हुए मकानों को 'गोलघर' नाम दिया है.

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    उत्तराखंड के नैनीताल से 30 किलोमीटर की दूरी पर मेहरोड़ा गांव है. यहां एक संस्था है, जिसका नाम गीली मिट्टी (Geeli Mitti Foundation Nainital) है. साल 2015 में इसकी शुरुआत हुई थी. संस्था की फाउंडर शगुन सिंह हैं, जिन्होंने शहर की चकाचौध जिंदगी छोड़कर गांव में बसने का फैसला किया और यहीं रहकर मिट्टी के पक्के मकान बनाने लगीं. मिट्टी के पक्के मकान की बात सुनकर आप भी बेशक हैरान होंगे लेकिन यह सच है.

    शगुन सिंह ने बताया कि उनके अनुसार पक्के घर वह होते हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल हों और जिनमें प्राकृतिक आपदा को झेलने की क्षमता हो. यह सोचकर उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए गांव में अपने लिए एक घर बनाया, जो टिकाऊ तो है ही, साथ ही साथ मॉडर्न लुक के मामले में भी किसी से कम नहीं है.

    शगुन का कहना है कि मेहरोड़ा गांव का मौसम समय-समय पर बदलता रहता है. कभी बहुत तेज बारिश हो जाती है, तो कभी जोरों की ठंड जकड़ लेती है लेकिन मौसम के इन सभी बदलावों के बावजूद इनके बनाए घरों में कुछ खास फर्क नहीं पड़ता है. गांव के लोगों ने इनके बनाए हुए मकानों को गोलघर नाम दिया है.

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