हिमालयी बुग्यालों को बचाने के लिए हाईकोर्ट ने दिए अहम निर्देश

पिछले कई सालों से इन बुग्यालों पर बने संकट पर चिन्ता तो जाहिर होती रही है, लेकिन इन हिमालयी बुग्यालों को अब हाईकोर्ट से संजीवनी मिली है.

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: August 22, 2018, 4:59 PM IST
हिमालयी बुग्यालों को बचाने के लिए हाईकोर्ट ने दिए अहम निर्देश
हिमालयी बुग्यालों को बचाने के लिए हाईकोर्ट ने दिए अहम निर्देश
Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: August 22, 2018, 4:59 PM IST
उत्तराखंड में हिमायल के खतरे से पूरी दुनियां वाकिफ है, लेकिन बुग्यालों (उच्च हिमालयी क्षेत्र में मखमली घास के मैदान) के संकट से भी मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है. पिछले कई सालों से इन बुग्यालों पर बने संकट पर चिन्ता तो जाहिर होती रही है, लेकिन इन हिमालयी बुग्यालों को अब हाईकोर्ट से संजीवनी मिली है.

मखमली घास और दूर तक फैली मनोरम वादियां यहां आने वाले लोगों और पर्यटकों को खूब आकर्षित करती है. लिहाजा, इसके संरक्षण को लेकर आली बेदनी बुग्याल संरक्षण समिति की याचिका पर सुनवाई कर सरकार को आदेश दे दिए गए हैं. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि इन बुग्यालों को बचाने के लिए सरकार 6 हफ्तों के अंदर इको डेवलपमेंट कमेटी का गठन कर स्थाई रूप से बने निर्माण को 3 महीने में हटाए. इसके साथ ही कोर्ट ने इन बुग्यालों पर 200 से ज्यादा पर्यटकों के जाने पर रोक लगा दी है. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इन स्थानों पर रात में रुकने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है. वहीं 6 हफ्तों के अंदर यहां से प्लास्टिक और अन्य कचरों को हटाने का आदेश दिया है. कोर्ट ने इन बुग्यालों पर व्यावसायिक प्रतिबंध लगाते हुए चरवाहों को भी निर्देश दिए हैं. साथ ही सरकार से ये भी कहा है कि उच्च हिमालयी बुग्यालों को नेशनल पार्क के रूप में विकसित करने पर भी विचार करें.

गौरतलब है कि बुग्यालों में मानवी दखल से बने खतरे को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी. इनको बेहतर किया जाए इसे लेकर भी कोर्ट से मांग की गई थी. दरअसल, औषधीय पेड़ों के स्रोत के साथ यहां 500 के करीब औषधीय प्रजातियां मिलती हैं. वैज्ञानिक भी औषधियों का दोहन और मानवीय दखल इनके लिए खतरा बता रहे हैं.

बहरहाल, जो मांग राज्य सरकार से पर्यवारण प्रेमी करते रहें उसको अब हाईकोर्ट ने पूरा किया है. बता दें कि उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में हिमशिखरों की तलहटी में जहां टिम्बर रेखा (यानी पेडों की पंक्तियाँ) समाप्त हो जाती हैं, वहां से हरे मखमली घास के मैदान आरम्भ होने लगते हैं. आमतौर पर ये 8 से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित होते हैं. गढ़वाल हिमालय में मखमली मैदानों को ही बुग्याल कहा जाता है.
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