सरकार ने माना कुमाऊं विवि के दीक्षांत समारोह के बिलों में हैं गड़बड़ियां, News18 की खबर पर लगी मुहर

कुमाऊं विवि के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल, उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह, सुप्रीम कोर्ट के जज समेत अन्य के लिए लगी वीआईपी कुर्सियों का बिल 2 लाख 58 हज़ार बना दिए गए थे. (फ़ाइल फ़ोटो)
कुमाऊं विवि के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल, उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह, सुप्रीम कोर्ट के जज समेत अन्य के लिए लगी वीआईपी कुर्सियों का बिल 2 लाख 58 हज़ार बना दिए गए थे. (फ़ाइल फ़ोटो)

ठेकेदार ने रुमाली रोटी का बिल ही अतिरिक्त 90 हज़ार का दिया तो 2 कॉफ़ी मशीनों का 84 हजार का बिल थमा दिया गया.

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नैनीताल. कुमाऊं विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह में फर्जी बिलों के मामले में न्यूज 18 की खबर पर मुहर लग गई है. हाईकोर्ट में सरकार ने बताया है कि ऑडिट रिपोर्ट में दीक्षांत समारोह के बिलों में गड़बडियां हैं. सरकार के इस जवाब के बाद हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने सरकार से कहा है कि इस मामले में एक हफ्ते के भीतर कार्रवाई करें और रिपोर्ट कोर्ट में दें. कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर सरकार कोई कदम नहीं उठाती है तो कोर्ट अगले हफ्ते ऑर्डर पास कर इस मामले में कार्रवाई करेगी.

कैसे पहुंचा हाईकोर्ट मामला

न्यूज 18 ने कुमाऊं विश्वविघालय में दीक्षांत समारोह में फर्जीवाड़े की खबर दिखाई थी. खबर के अनुसार 5 लाख के बिलों को 23 लाख का बनाकर विश्वविद्यालय पर पेमेंट का दबाव डाला गया. इसमें रुमाली रोटी का बिल ही 90 हज़ार का अतिरिक्त दिया तो 2 कॉफ़ी मशीनों का 84 हजार का बिल थमा दिया गया. इसके अलावा टेंट लगाने के नाम पर भी फर्जी बिल विश्वविघालय को दिए गए. इसके साथ ही वीआईपी कुर्सी लगाने पर भी लाखों का बिल विश्वविद्यालय को दिया गया था.



खबर का संज्ञान लेकर नैनीताल के गोपाल सिंह बिष्ट ने जनहित याचिका दाखिल की. याचिका में मांग की गई कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए. साथ ही जनता के पैसे की बर्बादी रोकने के साथ अब तक किए गए भुगतान की वसूली की जाए.
क्या-क्या हैं गड़बडियां

दरअसल 7 मार्च को आयोजित दीक्षांत समारोह के लिए टेंडर में विश्वविघालय ने 1200 लोगों के लिए 2 लाख 27 हजार का टेंडर व्यवस्थाओं के लिए दिया था. लेकिन 476 लोगों को बढ़ा हुआ दिखाकर एक लाख, सात हज़ार का बिल खाने का और थमा दिया गया. वह भी तब जब कर्मचारी हड़ताल पर थे.

ठेकेदार को विश्वविद्यालय में ऐसी कमाई दिखी कि 2 कॉफी मशीनों के नाम पर 84 हजार का अतिरिक्त बिल दे दिया तो रुमाली रोटी के लिए 90 हज़ार की मांग अलग से कर दी. दो लाख 70 हजार से बिल बढ़कर पांच लाख 50 हज़ार पहुंचा तो वाटरप्रूफ टेंट के लिए भी 15 लाख, 34000 की रकम मांगी गई.

राज्यपाल, उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह, सुप्रीम कोर्ट के जज समेत अन्य के लिए लगी वीआईपी कुर्सियों का बिल 2 लाख 58 हज़ार बना दिया गया. महज़ 3 घंटे के दीक्षांत समारोह का बिजली का बिल ही 2 लाख 72 हज़ार का दे दिया गया. इस पर जब बिल विश्वविद्यालय पहुंचा तो 23 लाख तक का बिल पेमेंट के लिए पेश कर दिया गया.
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