एमकेपी कॉलेज में 45 लाख के घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराए सरकारः हाईकोर्ट
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एमकेपी कॉलेज में 45 लाख के घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराए सरकारः हाईकोर्ट
एमकेपी की पूर्व छात्रा सोनिया बेनीवाल ने हाईकोर्ट में यह जनहित याचिका दायर की थी.

इस घोटाले से यूजीसी ने एमकेपी को अगली पंचवर्षीय योजना में कोई पैसा नहीं दिया जिसके चलते कॉलेज की हालत ख़स्ता हो गई.

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नैनीताल. उत्तराखण्ड हाइकोर्ट ने महादेवी कन्या पाठशाला (MKP कॉलेज) में यूजीसी के बजट के 45 लाख रुपये के गबन पर राज्य सरकार को दोषियों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए और जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया है. इससे पहले हाईकोर्ट राज्य सरकार, यूजीसी और तत्कालीन निदेशक और प्राचार्य को नोटिस जारी कर चुका था. घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए एमकेपी की पूर्व छात्रा सोनिया बेनीवाल ने हाईकोर्ट में यह जनहित याचिका दायर की थी. मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने इस मामले क सुनवाई की.

घपला 

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा 2012-2013 में 45 लाख रुपये के गबन के मामले में राज्य सरकार, यूजीसी और तत्कालीन सचिव जितेंद्र सिंह नेगी और प्राचार्य डॉक्टर किरन सूद को नोटिस जारी किए थे.



यूजीसी की 45 लाख रुपये की ग्रांट एमकेपी में छात्राओं की शिक्षा में सहूलियत के लिए जारी की गई थी. एमकेपी किसी भी बुनियादी सुधार के लिए यूजीसी की इन ग्रांट पर ही निर्भर करता है. इसी ग्रांट से पहले कैंपस में वाई-फ़ाई इत्यादि लगाया गया था लेकिन 2012-2013 के दौरान इस पैसे का इस्तमाल एप्पल के महंगे उपकरण खरीदने में किया गया. ऐसे कई उपकरण 2019 तक के परीक्षण में पाए ही नहीं गए.
नियमावली के अनुसार टेंडर न करते हुए केवल कोटेशन के आधार पर पैसों की बन्दरबांट की गई. एक जगह आर्डर की डेट के बाद का कोटेशन लगाया गया. किसी जगह बिल से अधिक का भुगतान किया गया और किसी जगह बिल से कम भुगतान किया गया.

अलग-अलग रिपोर्ट 

राज्य सरकार द्वारा ऑडिट कराने पर यह सरासर गलत पाया गया और डॉक्टर सूद और जितेंद्र नेगी से वसूली की बात की गई. सीएजी से भी इस प्रकरण की जांच कराई गई जिसमें सीएजी ने कहा कि सभी खरीदारी शक के घेरे में हैं.

घोटाले पर 2016-2017 में एफआईआर भी दर्ज हुई लेकिन मामले को दबाए रखा गया. 2019 जनवरी में शासन के स्थलीय निरक्षण के दौरान भी 7,68,000 रुपये का सामान मिला ही नहीं. इस वजह से यूजीसी ने एमकेपी को अगली पंचवर्षीय योजना में कोई पैसा नहीं दिया जिसके चलते कॉलेज की हालत ख़स्ता हो गई और नुकसान छात्राओं को उठाना पड़ा.

इस मामले में रोचक मोड़ तब आया जब सरकार के ही दो विभाग- उच्च शिक्षा और पुलिस, अपने-अपने शपथपत्र में अलग-अलग राग अलापते नज़र आए. एक ओर पुलिस ने जितेंद्र सिंह नेगी को क्लीन चिट देने का प्रयास किया तो  दूसरी ओर उच्च शिक्षा सचिव ने जितेंद्र सिंह नेगी को इस वित्तीय गड़बड़झाले का दोषी करार दिया.

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