ऐसे सुधरेगी स्वास्थ्य व्यवस्था! हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में दो दिन में तीन डॉक्टरों का इस्तीफ़ा

प्रिंसिपल डॉक्टर सीपी भैसोड़ा बताते हैं कि डॉक्टर बेहतर वेतन और समयबद्ध प्रमोशन की मांग कर रहे थे, जिसकी राज्य कोई नीति ही नहीं है.

ETV UP/Uttarakhand
Updated: March 13, 2018, 4:49 PM IST
ऐसे सुधरेगी स्वास्थ्य व्यवस्था! हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में दो दिन में तीन डॉक्टरों का इस्तीफ़ा
पिछले दो दिन में राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी के तीन डॉक्टरों ने कॉलेज को अलविदा बोल दिया है.
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Updated: March 13, 2018, 4:49 PM IST
प्रदेश के नंबर वन सरकारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में काम करने वाले डॉक्टरों और फैकल्टी मैंबर्स की हालत खराब है. रेगुलर नियुक्ति न मिलने और समय से प्रमोशन न मिलने के चलते कई डॉक्टर अस्पताल छोड़ कर जा रहे हैं. हालात ये हैं कि पिछले दो दिन में तीन डॉक्टरों ने कॉलेज को​ अलविदा बोल दिया है.

राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी से जुड़ा सुशीला तिवारी अस्पताल कुमाऊं के मरीज़ों की अंतिम उम्मीद माना जाता है और इसके पीछे डॉक्टरों की वो बेहतरीन टीम है जिसके अनुभव के आगे बड़ी-बड़ी बीमारियां घुटने टेक देती हैं.

अब इस अस्पताल को ही एक गंभीर रोग ने अपनी चपेट में ले लिया है. सरकार की गलत नीतियां कहिए या कुछ और अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर लगातार यहां से छोड़ कर जा रहे हैं. हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर सीपी भैसोड़ा बताते हैं कि डॉक्टर बेहतर वेतन और समयबद्ध प्रमोशन की मांग कर रहे थे, जिसकी राज्य कोई नीति ही नहीं है.

वह यह भी कहते हैं कि उत्तराखंड में पे स्केल बाकी राज्यों की तुलना में कम है इसलिए भी डॉक्टर यहां की नौकरियों में टिक नहीं रहे हैं.

दरअसल साल 2010 से मेडिकल कॉलेज में रेगुलर फैकल्टी की नियुक्ति नहीं हुई है. ज्यादातर डॉक्टर कांट्रेक्ट पर नौकरी कर रहे हैं. डॉक्टरों का यह भी कहना है कि काम करने वाले डॉक्टरों का समय से प्रमोशन नहीं होता.

मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर को इंटर कॉलेज के टीचर के बराबर वेतन मिलता है. एक शिकायत यह भी है कि आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रोफेसर से भी कम मिलता है एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर को वेतन.

लगातार डॉक्टरों के छोड़ने से मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले डॉक्टरों की डिग्री पर भी संकट है क्योंकि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया यानी एमसीआई की टीम पहले ही फैकल्टी की कमी पर कॉलेज को नोटिस थमा चुकी है. फैकल्टी की कमी का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां 113 पदों में से फैकल्टी के 40पद पिछले कई साल से खाली हैं.

(हल्द्वानी से शैलेंद्र नेगी की रिपोर्ट)
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