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पहले जीती बाजी हारे,फिर हारी बाजी जीते हरीश रावत

पहले जीती बाजी हारे,फिर हारी बाजी जीते हरीश रावत

IBN KHABAR

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आखिरकार 55 वें दिन उत्तराखंड का सियासी संकट खत्म हो गया. एक बार फिर से उत्तराखंड की सत्ता पर काबिज हुए हरीश रावत ने इन दिनों में काफी उतार-चढ़ाव देखे. राजनीति के अनुभवी खिलाड़ी होने के बावजूद हरीश रावत बगावत को भांप नहीं पाए और जीती हुई बाजी हार गए थे

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    आखिरकार 55 वें दिन उत्तराखंड का सियासी संकट खत्म हो गया. एक बार फिर से उत्तराखंड की सत्ता पर काबिज हुए हरीश रावत ने इन दिनों में काफी उतार-चढ़ाव देखे. राजनीति के अनुभवी खिलाड़ी होने के बावजूद हरीश रावत बगावत को भांप नहीं पाए और जीती हुई बाजी हार गए थे लेकिन बाद में उन्होंने हारी हुई बाजी को फिर से जीता है. आइए आपको बताते हैं कि हरीश रावत पहले कैसे जीती हुई बाजी हारे और फिर कैसे हारी हुई बाजी को जीते.

    जीती बाजी ऐसे हारे हरदा
    पहले आपको बताते हैं कि हरीश रावत कैसे जीती हुई बाजी को हारे थे. इसके लिए हमें जाना होगा 17 मार्च की उस रात जब एक होटल में भाजपा रणनीति बना रही थी और हरीश रावत कोई काउंटर नहीं कर पाए थे. 18 मार्च को विधानसभा में भी हरीश रावत आश्वस्त बैठे थे और कांग्रेस के 9 विधायकों ने बगावत कर दी. ऐसा लगा जैसे हरीश रावत पूरे संकट को भांप ही नहीं पाए. इसके बाद 26 मार्च को मुख्यमंत्री हरीश रावत का स्टिंग ऑपरेशन सामने आया तो उनकी पूरी ताकत उस पर सफाई देने में लग गई. इसी बीच 27 मार्च को केंद्र ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया और हरीश रावत सरकार की विदाई हो गई.

    हारी बाजी ऐसी बदली जीत में
    अब आपको बताते हैं कि हारी हुई बाजी को हरीश रावत ने कैसे जीता. 18 मार्च को शुरु हुए सियासी संकट के बाद हरीश रावत के लिए राहत की पहली खबर 27 मार्च को आई. स्पीकर ने बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त कर दी. इससे हरीश रावत खेमा मजबूत हुआ और बाद में यही रावत की जीत का आधार भी बना. 30 मार्च को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने हरीश रावत को सदन में बहुमत साबित करने का मौका देने का फैसला दिया था. डबल बेंच से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक यह फैसला स्टेंड करता रहा. 6 मई को केंद्र ने फ्लोर टेस्ट के लिए हामी भरी और सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को फ्लोर टेस्ट कराने का दिया आदेश दिया था. यहीं से हरीश रावत की जीत की पटकथा की शुरुआत हो गई थी. 9 मई को हाईकोर्ट ने बागियों की याचिका की खारिज कर दी और सुप्रीम कोर्ट ने भी बागियों को तत्काल कोई राहत देने से इनकार कर दिया. इसके बाद आया 10 मई का वह अहम दिन,जब उत्तराखंड राज्य के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फ्लोर टेस्ट हुआ. अब हरीश रावत फिर से सत्ता में लौटे हैं लेकिन जीत के जश्न में हरदा को हार के हर वजह को याद रखना होगा. याद रखना होगा कि लोकतंत्र में हर जीत जनता की होती है. जनता को भूले तो जीत के हार में बदलते देर नहीं लगती.

    Tags: Uttarakhand news

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