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हरीश रावत स्टिंग केसः CBI को नहीं मिली FIR की इजाजत, हाईकोर्ट में 1 अक्टूबर तक टाली सुनवाई

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: September 20, 2019, 12:50 PM IST
हरीश रावत स्टिंग केसः CBI को नहीं मिली FIR की इजाजत, हाईकोर्ट में 1 अक्टूबर तक टाली सुनवाई
नैनीताल क्लब में हरीश रावत के समर्थन में जुटे कांग्रेस नेता हाईकोर्ट के फ़ैसले का इंतज़ार करते हुए.

सीबीआई ने हरीश रावत के वकीलों के तर्कों का विरोध करते हुए कोर्ट में कहा कि जांच पूरी हो गई है और उसे एफ़आईआर दर्ज करने की अनुमति मिलनी चाहिए.

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नैनीताल में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग केस में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हरीश रावत के वकीलों के आग्रह पर एक अक्टूबर पर सुनवाई को टाल दिया है.  इससे पहले जस्टिस रमेश खुल्बे की कोर्ट में सुनवाई शुरु होते ही हरीश रावत के वकीलों ने इस मामले में बहस की शुरुआत की और कोर्ट से कल बहस करने का समय मांगा था. सीबीआई ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जांच पूरी हो गई है और उसे एफ़आईआर दर्ज करने की अनुमति मिलनी चाहिए. इसके बाद कोर्ट ने एक अक्टूबर तक सुनवाई टाल दी.




कांग्रेस नेताओं का जमावड़ा 

इस बीच आज सुबह से ही हरीश रावत के समर्थन में कांग्रेस नेता नैनीताल पहुंचने लगे थे. नैनीताल क्लब में नेताओं का जमावड़ा लगने लगा था. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय नैनीताल पहुंच गए थे. इनके अलावा पूर्व विधायक तिलक राज बेहड़, पूर्व विधायक हिमेश खर्कवाल, धारचूला के विधायक हरीश धामी भी नैनीताल पहुंच गए हैं.बगावत और स्टिंग 

बता दें कि 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत के नेतृत्व में 9 कांग्रेस विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के ख़िलाफ़ बगावत कर दी थी. इसके बाद केंद्र सरकार ने हरीश रावत सरकार को बर्खास्त कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था. हरीश रावत हाईकोर्ट गए थे जहां से उनकी सरकार बहाल हुई थी.

इस दौरान उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के एक निजी चैनल के मालिक ने हरीश रावत का स्टिंग किया था जिसमें वह हरीश रावत से विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त की बात करते दिखाई दिए थे. इसी स्टिंग को आधार बनाकर तत्कालीन राज्यपाल ने इसकी सीबीआई जांच की सिफ़ारिश कर दी थी.

सीबीआई जांच 

सरकार बहाल होने के बाद हरीश रावत ने इस केस की जांच सीबीआई के बजाय एसआईटी से करवाने की सिफ़ारिश की थी लेकिन अंततः यह मामला सीबीआई के पास ही रहा. इसके बाद हरीश रावत गिरफ़्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट की शरण में चले गए थे और हाईकोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया था कि कोई भी कार्रवाई करने से पहले वह कोर्ट से अनुमति ले.

तीन सितंबर को सीबीआई ने हाईकोर्ट को यह जानकारी दी थी कि उसने इस केस की जांच पूरी कर ली है और वह जल्द ही इस मामले में एफ़आईआर दर्ज करना चाहती है. हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई आज यानी 20 सितंबर को तय की गई थी.

एक साथ दिखे कांग्रेस नेता 

हरीश रावत के लिए केस की सुनवाई में मौजूद रहने की पाबंदी नहीं थी लेकिन उन्होंने वह गुरुवार को ही नैनीताल पहुंच गए थे और फ़ेसबुक से इस बात की जानकारी भी दे दी थी. उनके समर्थन में कांग्रेस नेताओं ने भी नैनीताल आने का ऐलान कर दिया था और आज लंबे अरसे बाद उत्तराखंड कांग्रेस के शीर्ष नेता एक साथ बैठे हुए दिखे हैं.

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First published: September 20, 2019, 11:56 AM IST
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