उत्तराखंडः जंगलों में आग पर हाईकोर्ट करेगा सुनवाई, 1300 हेक्टेयर से ज्यादा की वन संपदा को नुकसान

उत्तराखंड के जंगलों में आग के मामले पर दाखिल जनहित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट आज करेगा सुनवाई.

उत्तराखंड के जंगलों में आग के मामले पर दाखिल जनहित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट आज करेगा सुनवाई.

Fire in Forests: उत्तराखंड के नैनीताल, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, अल्मोड़ा समेत गढ़वाल के जंगलों में आग से वन संपदा और वन्यजीवों को बड़ा नुकसान. पर्यावरण अधिकार कार्यकर्ता की याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट आज करेगा सुनवाई.

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नैनीताल. उत्तराखंड के जंगलों में आग भयावह रूप ले चुकी है. सरकार ने आग बुझाने के लिए केंद्र सरकार से मदद मांगने के साथ-साथ वायुसेना से चॉपर लिए हैं, ताकि 1300 हेक्टेयर से ज्यादा इलाके में फैली आग बुझाई जा सके. ये हेलिकॉप्टर आज से इस काम में जुट भी गए हैं. इस बीच जंगलों में आग को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है, जिस पर अदालत आज ही सुनवाई भी करने वाला है.

उत्तराखंड में जंगलों की आग के कारण न सिर्फ 1350 हेक्टेयर में फैली वन संपदा जल गई है, बल्कि जंगली जानवरों के आवास भी जल रहे हैं. नैनीताल, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, अल्मोड़ा समेत गढ़वाल के भी कई हिस्सों में आग का तांडव जारी है. केंद्र सरकार ने उत्तराखंड की आग बुझाने के लिए 2 हेलिकॉप्टर भेजे हैं. बताया गया है कि ये हेलिकॉप्टर हल्द्वानी से उड़ान भरेंगे और नैनीताल के भीमताल से पानी लेकर जंगल पर छिड़काव करेंगे. नैनीताल में कई इलाकों में पिछले 4 दिनों से जंगल जल रहे हैं.

पहाड़ के जंगलों में लगी आग को लेकर पर्यावरण अधिकार कार्यकर्ता और हाईकोर्ट के अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने याचिका दायर की है. दुष्यंत कहते हैं कि साल 2016 में भी जब आग ने भीषण रूप लिया था, उस समय हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया था. अदालत ने इस बाबत कई निर्देश भी जारी किए थे. उन्होंने कहा कि इन निर्देशों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण ही इस बार जंगल की आग ने भीषण रूप अख्तियार किया है.

दुष्यंत बताते है कि 2016 में हाईकोर्ट ने 10000 फायर वॉचर की नियुक्ति करने और आग बुझाने के आधुनिक संसाधन खरीदने का निर्देश दिया था. साथ ही 72 घंटे से ज्यादा आग जारी रहने पर संबंधित वन संरक्षक की जिम्मेदारी तय करने के आदेश भी दिए थे. लेकिन सरकार ने इन निर्देशों पर अमल नहीं किया. हाईकोर्ट में दायर याचिका को लेकर दुष्यंत ने कहा कि पिछले 15 दिनों में आग से व्यापक हानि हुई है, जिससे जंगल और पर्यावरण को खतरा बना हुआ है.
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