बाबा रामदेव की 'कोरोना दवा' पर हाईकोर्ट का केंद्र सरकार को नोटिस... कल ही दाखिल करना होगा जवाब

हाईकोर्ट ने कोरोना के वायरस से निजात दिलाने वाली कोरोनिल टैबलेट लांच करने के खिलाफ़ दायर याचिका पर केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया है.
हाईकोर्ट ने कोरोना के वायरस से निजात दिलाने वाली कोरोनिल टैबलेट लांच करने के खिलाफ़ दायर याचिका पर केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया है.

अधिवक्ता मनि कुमार ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर इस दवा को बाजार में बैन करने की मांग की है.

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नैनीताल. बाबा रामदेव व उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण ने भले ही कोरोना की दवा बनाने के मामले पर यू-टर्न ले लिया हो मगर कोरोना की दवा बनाने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है. आज हाईकोर्ट ने कोरोना के वायरस से निजात दिलाने वाली कोरोनिल टैबलेट लांच करने के खिलाफ़ दायर याचिका पर केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया है. हाईकोर्ट के वकील मणि कुमार की याचिका को सुवनाई के लिए स्वीकार कर कोर्ट ने केन्द्र सरकार को नोटिस जारी कर कोर्ट में कल ही अपना पक्ष रखने को कहा है. हाईकोर्ट कल, बुधवार को, भी इस मामले की सुनवाई करेगा.

आयुष मंत्रालय की क्लीन चिट

बता दें कि पिछले मंगलवार यानी 23 जून को बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने कोरोना की सफल इलाज का दावा करते हुए 'कोरोनिल' टैबलेट के साथ एक कोरोना किट लॉंच की थी. उनके यह ऐलान करते ही ख़बर वायरल हो गई और केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने दिव्य योग फ़ार्मेसी और राज्य सरकार से इस मामले में स्पष्टीकरण तलब कर लिया था.



इसके बाद उत्तराखंड का आयुष विभाग हरकत में आया और दिव्य योग फ़ार्मेसी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा. दिव्य योग फ़ार्मेसी ने शुक्रवार को इसका जवाब दे दिया था जिसमें कहा गया कि उनकी ओर से कोरोना की दवा बनाने का कोई दावा नहीं किया गया.
केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने आज दिव्य योग फ़ार्मेसी को इस मामले में क्लीन चिट दे दी है. केंद्र ने कहा कि दिव्य योग फ़ार्मेसी इम्युनिटी बूस्टर की तरह इसका प्रचार कर सकती है और बेच सकती है और आयुष मंत्रालय के दिशानिर्देशों के मुताबिक क्लीनिकल ट्रायल भी जारी रख सकती है.

बैन करने की मांग

इधर अधिवक्ता मनि कुमार ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर इस दवा को बाजार में बैन करने की मांग की है. याचिका में कहा गया है कि दवा कम्पनी ने आईसीएमआर द्वार जारी गाइडलाइन का पालन नहीं किया तो आयुष मंत्रालय भारत सरकार की भी अनुमति नहीं ली. इसके अलावा आयुष विभाग उत्तराखण्ड से भी कोरोना की दवा बनाने के लिए अनुमति उसे नहीं मिली है.

याचिका में कहा गया है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की आड़ में बाबा रामदेव ने कोरोनिल दवा का निर्माण किया. दिव्य योग फ़ार्मेसी ने निम्स विश्वविद्यालय राजस्थान द्वारा दवा का परीक्षण होना बताया गया जबकि निम्स का कहना है कि उन्होंने ऐसी किसी भी दवा का क्लिनिकल परीक्षण नहीं किया है.



याचिका में बाबा पर दवा का भ्रामक प्रचार करने के आरोप के साथ कहा गया है कि इसका क्लिनिकल परीक्षण नहीं किया गया है इसके उपयोग से शरीर में क्या साइडइफेक्ट होंगे इसकी कोई जानकारी नहीं है. याचिका में दवा की बिक्री को रोकने और भ्रामक प्रचार पर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है. हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कल ही इस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा है.

 
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