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उत्तराखंड जंगल में आगः अब हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती, तीरथ सरकार को दिया ये आदेश

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक आदेश में सरकार को कहा है कि वह फॉरेस्ट फायर रोकने के लिए वन विभाग में भर्तियां करे.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक आदेश में सरकार को कहा है कि वह फॉरेस्ट फायर रोकने के लिए वन विभाग में भर्तियां करे.

Uttarakhand Forest Fire: उत्तराखंड में फारेस्ट फायर को लेकर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए बड़ा आदेश दिया है. हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस कोर्ट ने वन विभाग के रेंजर, फॉरेस्ट गार्ड़ समेत वन विभाग में खाली पडे़ पदों को छह महीने के अंदर भरने को कहा है.

  • Last Updated: April 7, 2021, 5:29 PM IST
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नैनीताल.  उत्तराखंड में फाॅरेस्ट फायर को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस कोर्ट ने वन विभाग के रेंजर, फारेस्ट, गार्ड़ समेत सभी पदों पर 6 महीने के भीतर रिक्त पदों को भरने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वन विभाग और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग को फंड़ जारी करने का साथ सरकार कृत्रिम बारिश कराने के लिये भी सरकार विचार करे. वो भी राज्य की संवेदनसील परिस्थितियों के अनुरुप. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि फायर सीजन से 2 महीने पहले आग पर काबू करने के लिये मैन पावर व संसाधन पूरे कर लिये जायें. कोर्ट ने आग को लेकर नेशनल पाॅलिसी बनाने का आदेश भी जारी किया है.

उत्तराखंड कोर्ट ने आग बुझाने के लिये उचित कदम उठाने के साथ सरकार को आदेश दिया है कि 2017 के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश का 6 महीने के भीतर पालन करें. एनजीटी ने 23 मार्च 2017 में राज्य की आग को लेकर नेशनल पाॅलिसी बनाने के साथ पर्याप्त संसाधन के साथ मैन पावर व आग बुझाने के लिये उच्च तकनीकी वाले उपकरण लेने का आदेश दिया था. अपने आदेश में NGT ने फायर मैपिंग के साथ ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने और रोजगार से जोड़ने का आदेश दिया था.

आधी जानकारी पर हाई कोर्ट सख्त
बुधवार को सुबह हाई कोर्ट में मामला सुनवाई के लिये आया और प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी सुबह कोर्ट में पेश हुए. इस दौरान कोर्ट ने फायर वाचर कितने हेक्टेयर में आग लगी और फायर वाच टावर और आग बुझाने के इंतजाम के साथ कितने लोग आग बुझाने के लिये लगे हैं. समेत कई सवाल पूछे, लेकिन इन सवालों का जवाब ही फारेस्ट चीफ के पास नहीं था. इस पर हाई कोर्ट ने प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी को 2 बजे तक सभी रिकार्ड़ के साथ आने को कहा.
इस दौरान प्रमुख वन संरक्षक ने हाई कोर्ट को बताया कि आग बुझाने के लिये वन कर्मियों को लगाया गया है. जिसमें झांप विधी व फायर लाइन काटने के साथ काउंटर फायर व हेलिकाॅप्टर से आग बुझाने का काम किया जा रहा है. वहीं राजीव भरतरी ने कोर्ट को बताया कि 65 प्रतिशत फाॅरेस्ट गार्ड़ के पद खाली होने के साथ अन्य पदों पर भी वन कर्मियों की कमी है.


हाईकोर्ट 2016 में भी दे चुका है आग को लेकर आदेश 

हाई कोर्ट का आग को लेकर ये कोई पहला आदेश नहीं है, इससे पहले 19 दिसंबर 2016 को आग को लेकर आदेश दिया था, जिसमें 10 हजार फायर वाचर रखने का आदेश दिया तो हाईटैक मशीनों से आग बुझाने के निर्देश सरकार को दिये इसके साथ ही पूरे साल आग की माॅनिटरिंग करने का भी कोर्ट ने आदेश दिया था. कोर्ट ने फायर एल्लट सिस्टम लगाने के साथ अपने आदेश में कहा कि अगर 72 घंटे से किसी जंगल में आग लगी है तो उस इलाके का वन अधिकारी इसके लिये जिम्मेदार माने जाएंगे. उनको स्वत: ही नौकरी से निलंबित मान लिया जायेगा. हालांकि इस आदेश के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट गई और सुप्रीम कोर्ट ने 23 मार्च 2017 हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी.

सुप्रीम कोर्ट से स्टे होने के बाद मामला NGT के दरवाजे पर पहुंचा, जिसके बाद राजीव दत्ता की याचिका पर 3 अगस्त 2017 को एनजीटी ने उत्तराखंड की फाॅरेस्ट फायर को लेकर आदेश जारी किया.
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