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'हम चुनाव हार गए तो...' BJP नेता ने डरकर कराए कर्मचारियों के ट्रांसफर! हाई कोर्ट ने लगाई रोक

'हम चुनाव हार गए तो...' BJP नेता ने डरकर कराए कर्मचारियों के ट्रांसफर! हाई कोर्ट ने लगाई रोक

भाजपा नेता के लिखे पत्र के आधार पर ट्रांसफर के मामले ने तूल पकड़ा.

भाजपा नेता के लिखे पत्र के आधार पर ट्रांसफर के मामले ने तूल पकड़ा.

बीजेपी नेताओं को अपनी ही सरकार (BJP Government) के अधिकारियों और कर्मचारियों पर भरोसा नहीं है! हाईकोर्ट में एक मामला पहुंचा, तो पता चला कि बीजेपी नेता को कुछ कर्मचारियों से हार का डर सता रहा है. चुनाव (Uttarakhand Election) में सियासी फायदे के मद्देनज़र तबादले होते रहे हैं, लेकिन चुनाव हारने के डर से लिखे शिकायती पत्र पर अब सरकार (Dhami Government) को कोर्ट में जवाब देना है. हालांकि जब तक जवाब फाइल होगा, तब तक उत्तराखंड में चुनाव संभवत: संपन्न हो चुके होंगे, लेकिन इस पूरे मामले से विपक्ष के हाथ एक मुद्दा तो और लग गया है.

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नैनीताल. उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेता सियासी गणित के हिसाब से कैसे नियुक्तियां करवा रहे हैं और कैसे ट्रांसफर? इसका साफ इशारा देने वाला एक बीजेपी नेता का पत्र सुर्खियों में आ गया है क्योंकि इसमें कुछ कर्मचारियों के तबादले करवाने की सिफारिश की गई थी, लेकिन अब इन तबादलों पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है. छुट्टी के दिन किए गए तबादलों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए हाई कोर्ट के सामने इसके खिलाफ जो आवेदन दिया गया था, उस पर सुनवाई करते हुए फिलहाल इन ट्रांसफरों पर रोक लगा दी गई है और ​फरियादी पक्ष के वकील का कहना है कि ट्रांसफर के आदेश नियमों के विरुद्ध दिए गए. कुल मिलाकर इस पत्र से राजनीति में भाजपा की किरकिरी होना तय है.

‘हमारी पार्टी चुनाव हारती है, तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी चुनाव आयोग की होगी.’ कुछ इस तरह की बात बीजेपी नेता मुकेश राणा ने चुनाव आयोग को लिखे एक पत्र में कही. इस तरह का दबाव बनाते हुए राणा ने उधमसिंह नगर के सहकारी विभाग में कार्यरत अपर्णा वल्दिया, लीला बोरा, विकास शर्मा और गौरव शर्मा के ट्रांसफर करने के लिए 29 नवम्बर को पत्र लिखा था. इस शिकायती पत्र पर सहायक चुनाव अधिकारी ने निर्देश दिए, लेकिन तबादला के आदेश 25 दिसंबर के अवकाश के दिन जारी हुए. अब इन आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती मिली, तो कोर्ट ने ट्रांसफर पर रोक लगा दी और इसे राजनीतिक शिकायत बता दिया.

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मुकेश राणा के लिखे पत्र की तस्वीरें न्यूज़18 पर.

मुकेश राणा पर लगे गंभीर आरोप
दरअसल मुकेश राणा बीजेपी के प्रांतीय परिषद के सदस्य हैं, जिन्होंने बिना किसी शपथ पत्र के दर्ज की गई शिकायत के आधार पर तीन साल से गृह जनपद में जमे कर्मचारियों के ट्रांसफर की सिफारिश की, तो विभाग ने भी देर किए बिना आदेश दे दिए. हांलाकि जब मामले को गंभीरता से देखा गया, तो पता चला कि राणा कथित तौर पर कुछ लोगों की नियुक्ति सहकारी विभाग में करवाने की तैयारी में थे और नाकाम होने पर तबादले का हथकंडा अपनाया.

बीजेपी विधायक का पत्र भी था चर्चा में
बीते दिनों भाजपा के ही एक विधायक का वह पत्र भी चर्चा में था, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपरोक्ष रूप से दो मंत्रालय संभालने वाले हरक सिंह रावत की शिकायत की थी. लैंसडाउन विधायक के हवाले से खबरों में कहा गया था कि रावत के दोनों ही मंत्रालय लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र की उपेक्षा कर रहे हैं और यहां भ्रष्टाचार की हाई लेवल जांच होनी चाहिए. विधायक ने अनिश्चितकालीन अनशन करने की धमकी भी इस पत्र में दी थी.

Tags: Uttarakhand BJP, Uttarakhand high court

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