कैसे बुझेगी Uttarakhand के जंगलों की आग... वनकर्मियों के पास ज़रूरी उपकरण, कपड़े ही नहीं

Nainital High Court ने वनकर्मियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए दायर PIL पर केन्द्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है.

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: August 22, 2019, 7:24 PM IST
कैसे बुझेगी Uttarakhand के जंगलों की आग... वनकर्मियों के पास ज़रूरी उपकरण, कपड़े ही नहीं
चंपावत में पेड़ों की टहनियों से आग बुझाने में जुटे वनकर्मी (फ़ाइल फ़ोटो). राज्य में वनकर्मियों को विभाग मूलभूत उपकरण और ड्रेस तक नहीं देता.
Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: August 22, 2019, 7:24 PM IST
उत्तराखंड सरकार जिन जंगलों को देश का ऑक्सीजन टैंक कहते ही और इनके नाम पर केंद्र से ग्रीन बोनस की मांग करती रही है उसे बचाने के लिए वन विभाग सक्षम ही नहीं है या इसके कर्ता-धर्ता इसे लेकर गंभीर नहीं हैं. हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में कहा गया है कि राज्य के वनों को बचाने के लिए वनकर्मियों के पास अपनी सुरक्षा से लेकर आग बुझाने के लिए ज़रूरी उपकरण ही नहीं हैं. हाईकोर्ट में इस जनहित याचिका को स्वीकार कर लिया है और इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केन्द्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्तों में शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.

असली काम प्रभावित 

बता दें कि इस साल भी वनाग्नि से राज्य के जंगलों को भारी नुक़सान हुआ है और वन विभाग ने पिछले कुछ सालों की तरह वनाग्नि बुझाने में अक्षमता ज़ाहिर करते हुए हाथ खड़े कर दिए थे. बारिश शुरु होने के बाद ही जंगलों की आग बुझ सकी थी.

वकील संदीप तिवाड़ी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर कहा है कि वन विभाग पर वनों और वन्यजीवों को बचाने का दायित्व है लेकिन ज़मीन पर काम कर रहे कर्मचारियों के पास काम करने के लिए आवश्यक उपकरण है ही नहीं. इसके अभाव में विभाग का मूल काम प्रभावित हो रहा है.

कपड़े-जूते तक नहीं वनकर्मियों के लिए 

याचिका में कहा गया है कि आग लगने के दौरान आग बुझाने के उपकरण, आग से बचाने वाले कपड़े  और सेटेलाइट फ़ोन जैसी सुविधाएं वनकर्मियों के पास हैं ही नहीं. याचिका में यह भी कहा गया है कि अगर किसी वन्य जीव का शिकार हो रहा है तो उसे बचाने के लिए बंदूक, जंगल में जाने के लिए स्पेशल ड्रेस, जूते जैसी चीज़ें भी वनकर्मियों को उपलब्ध नहीं हैं.

याचिका में मांग की गई है कि जो वनकर्मी वनों को बचाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं उनको अपना जीवन और वन्यजीवों, वनों को बचाने के लिए ज़रुरी उपकरण दिए जाएं. कोर्ट ने पूरे मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए राज्य व केन्द्र सरकार से जवाब मांगा है.
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First published: August 22, 2019, 7:24 PM IST
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