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सिंचाई मंत्री को नहीं लगता लेकिन वैज्ञानिकों है डर... भीमताल बांध की दरारों से हो सकता है बड़ा हादसा

कुमाऊं विश्वविघालय के भूविज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने इस बांध की हालत पर सवाल खड़े किए हैं.

कुमाऊं विश्वविघालय के भूविज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने इस बांध की हालत पर सवाल खड़े किए हैं.

सिंचाई विभाग नैनीताल और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी ने दरारों पर काम शुरु तो किया लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकल सका.

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नैनीताल. भीमताल डैम को लेकर आवाजें इस कदर उठीं कि इसकी गुंज विधानसभा तक सुनाई दीं लेकिन सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने सदन में कह दिया कि बांध से इसके प्रभाव क्षेत्र में रहने वाले लोगों को कोई खतरा नहीं है. अब वैज्ञानिक फिर चेता रहे हैं कि ये लापरवाही बहुत भारी पड़ सकती है और बांध पर मंडरा रहे खतरों को लेकर संजीदा होने की ज़रूरत है.

खतरा 

भीमताल झील के इस बांध से खतरा खत्म नहीं हुआ है. कुमाऊं विश्वविघालय के भूविज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने इस बांध की हालत पर सवाल खड़े किए हैं. झील के कई रास्तों पर रिसाव होने से बांध पर  खतरे का अंदेशा पैदा हो गया है तो कई स्थानों पर पड़ी दरारें और पानी निकलने के नए रास्तों ने स्थानीय लोगों के साथ भूगर्भ वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दिया है.



इस झील पर कुमाऊं विश्वविद्वाय के भूविज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक बहादुर सिंह कोटलिया शोध कर रहे हैं. वह कहते हैं कि झील में गाद और पानी से बांध पर दबाव बना हुआ है जो भविष्य के लिए खतरा हैं.
जवाब का इंतज़ार 

पिछले कुछ सालों से लगातार झील में रिसाव हो रहा है, जिससे झील और बांध के निचले इलाकों पर खतरा बना हुआ है. पिछले दिनों विधानसभा में उठे सवाल के बाद सिंचाई मंत्री ने खतरे को नकार दिया था. सिंचाई विभाग नैनीताल और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (एनआईएस) ने दरारों पर काम शुरु तो किया लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकल सका.

अब विभाग इसके लिए नए स्तर से कार्रवाई करने की बात कर रहा है. सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता हरीश चंद्र सिंह कहते हैं कि बांध के क्रैक को गोल्डन आइसोटॉप से ही ट्रैक किया जा सकता है और यह काम भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र ही कर सकता है. एनआईएस ही भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र से बात कर रहा है और विभाग उनके जवाब का इंतज़ार.

1882 के दौरान बना भीमताल डैम अब बूढ़ा हो चुका है जिसकी हालत अब देखी भी जा सकती है. जो चिंता भू वैज्ञानिकों ने जताई है उसको लेकर अगर सरकार जल्द ठोस कदम नहीं उठाती है तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं.

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