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देहरादून में अतिक्रमण का मुद्दा फिर पहुंचा हाईकोर्ट... PIL में अधिकारियों पर भेदभाव, लापरवाही का आरोप

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: November 20, 2019, 3:14 PM IST
देहरादून में अतिक्रमण का मुद्दा फिर पहुंचा हाईकोर्ट... PIL में अधिकारियों पर भेदभाव, लापरवाही का आरोप
हाईकोर्ट के आदेश पर पिछले साल भी देहरादून में अतिक्रमण हटाए गए थे लेकिन कई जगहों पर फिर कब्ज़े हो गए हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)

याचिका में यह भी कहा गया है कि पिछले साल हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिन स्थानों से अतिक्रमण हटाए गए थे वहां फिर अवैध कब्ज़े हो गए हैं और ज़िम्मेदार अधिकारी जानबूझकर चुप्पी ओढ़े हैं.

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नैनीताल. अस्थाई राजधानी देहरादून (Dehradun) में अतिक्रमण (Encroachment) का मुद्दा एक बार फिर नैनीताल हाईकोर्ट (Nainital High Court) में पहुंच गया है. हाईकोर्ट में दाखिल एक पीआईएल (PIL) में कहा गया है कि अतिक्रमण हटाने वाली एजेंसिंया भेदभाव कर रही हैं और किसी का अतिक्रमण हटा रही हैं तो किसी को छोड़ दे रही हैं. पीआईएल में यह भी कहा गया है कि पिछले साल जहां से अतिक्रमण हटाए गए थे वहां फिर हो गए हैं. याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार, एमडीडीए, देहरादून नगर निगम और कैंट बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

भेदभावपूर्ण कार्रवाई 

देहरादून में अतिक्रमण को लेकर सरकार और स्थानीय निकायों की अनदेखी का ही आलम है कि बहुत सारी सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा हो गया है और 20 से ज़्यादा सरकारी विभागों को ज़मीन नहीं मिल रही है. आलम यह है कि ज़िला प्रशासन तक को पता नहीं है कि उसकी पास कहां और कितनी ज़मीन है. देहरादून नगर निगम की हालत तो यह है कि वह दूसरे विभागों की ज़मीन पर कब्ज़ा कर मार्केट बना रहा है.

ऐसे में अतिक्रमण हटाने को लेकर भेदभावपूर्ण कार्रवाई के आरोप लगते रहे हैं. अब आकाश यादव और अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर बाक़ायदा आरोप लगाया है कि निगम अतिक्रमण हटाने में ‘पिक एंड चूज़’ पॉलिसी अपना रहा है यानी कि मुंह देखकर कार्रवाई कर रहा है.

फिर हुए अवैध कब्ज़े 

याचिका में यह भी कहा गया है कि पिछले साल हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिन स्थानों से अतिक्रमण हटाए गए थे वहां फिर अवैध कब्ज़े हो गए हैं और ज़िम्मेदार अधिकारी जानबूझकर चुप्पी ओढ़े हैं. याचिका में दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की गई है.

जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार, देहरादून-मसूरी विकास प्राधिकरण (MDDA), देहरादून नगर निगम, और कैंट बोर्ड को नोटिस जारी किए हैं. कोर्ट ने इन सभी को 4 हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.
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First published: November 20, 2019, 2:33 PM IST
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