पंचायतों में सुविधाएं हैं नहीं मगर बना दिए क्वारंटाइन सेंटर, लोगों में कोरोना इंफेक्शन का डर
Nainital News in Hindi

पंचायतों में सुविधाएं हैं नहीं मगर बना दिए क्वारंटाइन सेंटर, लोगों में कोरोना इंफेक्शन का डर
शहर से दूर इन गांवों में खाने-पीने के लिए राशन की दिक्कतें हैं तो लाइट, रजाई-गद्दों की कमी समेत इन क्वारंटीन सेंटरों में की परेशानियां हैं.

कोरोना वायरस (COVID-19) के संक्रमण के खतरे को देखते हुए नैनीताल समेत पहाड़ों में जिन पंचायत भवनों और स्कूलों में लोगों को क्वारंटाइन किया जाना है, उनमें मूलभूत सुविधाओं का अभाव है.

  • Share this:
नैनीताल. कोरोना वायरस (COVID-19) के संक्रमण के खतरे को देखते हुए महानगरों से लौट रहे प्रवासियों को क्वारंटाइन करने के लिए सरकार ने ग्राम पंचायतों को ज़िम्मेदारी तो दे दी, लेकिन यह सुनिश्चित नहीं किया कि वह इसे निबाहने में सक्षम भी हैं या नहीं? नैनीताल के पहाड़ी इलाकों में ग्राम पंचायतों के पास न तो संसाधन हैं और न ही ग्राम प्रधान इतने मजबूत हैं कि वह अपने स्तर से लोगों की मदद कर पाएं. नैनीताल समेत पहाड़ों में जिन पंचायत भवनों और स्कूलों में लोगों को क्वारंटाइन किया जाना है, उनमें मूलभूत सुविधा का अभाव है.

संसाधन ही नहीं हैं

शहर से दूर इन गांवों में खाने-पीने के लिए राशन की दिक्कतें हैं तो लाइट, रजाई-गद्दों की कमी समेत इन क्वारंटाइन सेंटरों में की परेशानियां हैं. इसके अलावा कई जगहों पर पंचायत भवनों की हालत भी खराब है.



खुर्पाताल के पूर्व प्रधान मनमोहन कनवाल बताते हैं कि सरकार ने ग्राम प्रधानों को आदेश दिया है कि वे सभी व्यवस्था पूरी करें मगर सरकार ने संसाधन कुछ भी नहीं दिए हैं. ऐसे में लोगों को अपने घरों से ही सभी सामान और खाना मंगाना होगा.
कनवाल कहते हैं कि अगर दिल्ली समेत अन्य महानगरों से आने वाले लोगों को होम क्वारंटाइन किया जाता है, तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की जिम्मेदारी उन्हीं की होगी. अगर उन्होंने नियमों का पालन नहीं किया और गांव में घूमते रहे तो गांव में भी कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा है.

सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं

कई स्थानों पर क्वारंटाइन नियमों की धज्जियां भी उड़ रही हैं. महानगरों से लौटे लोगों में से कोई क्रिकेट खेलने निकल रहा है तो कोई लोगों के साथ बैठकर गप्पें मार रहा है.

नाम न छापने की शर्त पर न्यूज 18 को गांव के लोगों ने बताया कि गांव में जो लोग आ रहे हैं वह सामाजिक दूरी का पालन नहीं कर रहे हैं और लोगों के बीच लगातार आ रहे हैं. मगर समस्या यह है कि अगर इन्हें टोकते हैं तो गांव में माहौल खराब होने का खतरा है और बाहर से आए लोगों के दुश्मनी पाल लेने का डर है.

कुछ ग्रामीण यह भी कह रहे हैं कि 14 दिन के लिए जिला प्रशासन को क्वारंटाइन सेंटर ज़िला मुख्यालयों में ही बनाना चाहिए, ताकि नियमों का पालन सही तरीके से किया जा सके. राजनीतिक लोग भी इस मामले पर कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि अगली बार चुनाव लड़ने में वोटों के नुकसान होने का डर है.

ये भी पढ़ें-

चित्रकूट के कमिश्‍नर परिवार सहित होम क्वारंटाइन, फॉलोअर निकला Corona पॉजिटिव

COVID-19: अखिलेश यादव ने ट्वीट कर साझा की तस्वीर, बोले- कोई है जो सुन रहा है?
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज