• Home
  • »
  • News
  • »
  • uttarakhand
  • »
  • साल 1880 का वह दिन, जिसने बदल दिया था नैनीताल का नक्शा! 

साल 1880 का वह दिन, जिसने बदल दिया था नैनीताल का नक्शा! 

नैनीताल

नैनीताल का DSA मैदान भूस्खलन के बाद बना था.

नैनी झील इस हादसे से पहले वर्तमान के मुकाबले काफी बड़ी हुआ करती थी.

  • Share this:

    नैनीताल का मल्लीताल आज जैसा दिखता है, शायद वह कभी वैसा था ही नहीं. 18 सितंबर,1880 का वह दिन नैनीताल के इतिहास में सबसे दर्दनाक दिनों में से एक था, जिसके बारे में लोग आज भी सोचते हैं तो कांप उठते हैं. 1880 में आए उस भूस्खलन ने नैनीताल के लोगों की दुनिया ही बदल दी. 43 ब्रिटिश नागरिकों समेत कुल 151 लोगों ने उस हादसे में अपनी जान गवाई थी.

    नैनीताल का डीएसए मैदान, जिसमें आज अलग-अलग खेल खेले जाते हैं, यह भी उसी भूस्खलन की वजह से ही बना था. नैनी झील इस हादसे से पहले वर्तमान के मुकाबले काफी बड़ी हुआ करती थी. नैना देवी मंदिर भी तब वर्तमान के बोट हाउस क्लब में मौजूद था, जो उस भूस्खलन की वजह से वहीं दब गया था. जिसके बाद उस मंदिर को वर्तमान के मौजूदा स्थान पर बनवाया गया.

    कुमाऊं विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के प्रोफेसर गिरीश रंजन तिवारी बताते हैं कि उस भूस्खलन की बारीकी को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने नैनीताल की पारिस्थिकी को मजबूत करने के लिए बहुत सारे उपाय किए थे. अंग्रेजों ने बहुत सारे नाले बनवाए, जिससे बरसात का पानी नालों से होकर झील में चला जाए. हिल सेफ्टी को लेकर उन्होंने काफी अलग-अलग कोशिशें भी कीं.

    अंग्रेजों के देश छोड़ने के बाद काफी साल तक उस हादसे को ध्यान में रखकर इन सभी प्रोटोकॉल का पालन किया गया, जिस वजह से नैनीताल में इस तरह की त्रासदी की कभी पुनरावृत्ति नहीं हुई है.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज