• Home
  • »
  • News
  • »
  • uttarakhand
  • »
  • बच्चों को जब नहीं मिलती कोई किताब, तो याद आते हैं नैनीताल के 'मामू'

बच्चों को जब नहीं मिलती कोई किताब, तो याद आते हैं नैनीताल के 'मामू'

मामू

मामू की दुकान पर हजारों किताबें उपलब्ध हैं.

मामू ने बताया कि कबाड़ बेचते समय जब भी वह किताबों को कबाड़ में देखते थे तो उन्हें बुरा लगता था.

  • Share this:

    नैनीताल व आसपास के जिलों में छात्रों को जब कोई किताब नहीं मिलती तो उन्हें नैनीताल के मामू याद आते हैं. मामू कबाड़ी, बस इतना ही परिचय काफी है. नैनीताल शहर में हर कोई इन्हें इसी नाम से जानता है. मामू किताबें बेचकर ही अपना घर चलाते हैं. वह इस काम को पिछले 30 साल से कर रहे हैं. अगर किसी भी बुक स्टोर में कोई किताब नहीं मिलती तो बच्चे सीधा मामू के पास चले आते हैं.

    मामू कबाड़ी का असली नाम राशिद अहमद है. इस नाम से लोग इन्हें बहुत कम ही जानते हैं. राशिद मूल रूप से धामपुर के रहने वाले हैं. छठवीं तक पढ़े राशिद 40 साल पहले धामपुर से नैनीताल आ गए थे और यहां रहकर कबाड़ का काम करने लगे. यहां वह अपनी बहन और भांजों के साथ रहते हैं. राशिद बताते हैं कि भांजों के मामू कहने से बाकी लोग भी उन्हें मामू कहने लगे और आज वह मामू कबाड़ी के नाम से पूरे नैनीताल में मशहूर हैं.

    शहर में उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने थे तो वह इनकी दुकान पर आए थे और इस काम के लिए बधाई दी थी. मामू का कहना है कि कबाड़ बेचते समय जब भी वह किताबों को कबाड़ में देखते थे तो उन्हें बुरा लगता था. जिस वजह से उन्होंने किताबों को बेकार होने के बजाय बच्चों को देना सही समझा.

    स्कूल की पढ़ाई कम होने के बावजूद भी मामू को किताबों का सटीक ज्ञान है. कौन सी किताब किस विषय के लिए और किस परीक्षा के लिए होती है, वह इससे अच्छी तरह वाकिफ हैं. यहां पहली कक्षा से लेकर विश्वविद्यालय तक की सभी किताबें मिल जाती हैं. नैनीताल ही नहीं बल्कि हल्द्वानी, अल्मोड़ा, रानीखेत और अन्य जगहों से भी लोग यहां किताब खरीदने आते हैं.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज