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ज़हरीले धुएं से पक्षियों की कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर... हिमालयन क्वेल पहले ही हुई गायब

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: October 28, 2019, 12:46 PM IST
ज़हरीले धुएं से पक्षियों की कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर... हिमालयन क्वेल पहले ही हुई गायब
दिवाली के बाद नैनीताल में भी धुआं ही धुआं दिख रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार यह पक्षियों के लिए बेहद हानिकारक है.

पक्षी विशेषज्ञ (Bird Expert) केएस सजवाण कहते हैं कि इन पटाखों का ज़हरीला धुआं (Poisonous smoke) और शोर उत्तराखण्ड (Uttarakhand) में पक्षियों की 692 प्रजातियों के अस्तित्व पर ख़तरा पैदा हो गया है.

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नैनीताल. दीपावली (Deepawali) आपके लिये खुशियां लेकर ज़रूर आई होगी लेकिन हर साल दिवाली पर पटाखों से पैदा होने वाला ज़हरीला धुआं (Poisonous Smoke) इंसानों ही नहीं जीव-जंतुओं के लिए भी नुक़सानदायक साबित हो रहा है. इंसानों पर प्रदूषण (Pollution) के दुष्प्रभाव के बारे में तो पिछले कुछ सालों से काफ़ी चर्चा हो रही है लेकिन कितने लोग जानते हैं कि जो ज़हर ये पटाखे वायुमंडल (Environment) में घोल रहे हैं उससे पशु-पक्षियों को भारी नुक़सान हो रहा है. जानकारों की मानें तो पक्षियों की कुछ प्रजाति इसकी वजह से लुप्त  होने के कगार पर हैं.

कई पक्षियों ने छोड़ा घोसला 

दिवाली के बाद उत्तराखंड ही नहीं देश भर में पटाखों का जानलेवा धुआं फैला हुआ है. पक्षी विशेषज्ञ केएस सजवाण कहते हैं कि इन पटाखों का ज़हरीला धुआं और शोर उत्तराखण्ड में पक्षियों की 692 प्रजातियों के अस्तित्व पर ख़तरा पैदा हो गया है.

सजवाण कहते हैं कि इस दौरान कई पक्षी अपने घोसले भी छोड़ चुके हैं. 18वीं सदी में पाई जाने वाली हिमालयन क्वेल गायब हो गई है तो 7 प्रकार की चिड़िया पर्यावरण पर पड़े इस असर से विलुप्ति के कगार पर हैं. हांलाकि पक्षी विशेषज्ञ मानते हैं कि 37 प्रजाति के पक्षियों पर ये धुआं सीधा असर कर रहा है.

इंसानों पर कुप्रभाव 

जिला अस्पताल नैनीताल डॉक्टर केएमएस दुग्ताल बताते हैं कि पटाखों से निकलने वाली ज़हरीली गैसों का इंसानों पर भी बहुत कुप्रभाव पड़ा है. पटाखों से निकलने वाले कार्ब मोनो आक्साइड, सल्फ़र डाइआक्साइड समेत अन्य गैसें धूल-मिट्टी के साथ मिलकर सांस के ज़रिए फेफड़ों में पहुंच रही हैं और दमा, रक्तचाप समेत ह्दय रोगों को बढ़ा रही हैं.

पर्यावरण दुनिया भर के लिए चिंता का विषय तो है लेकिन शायद हम खुद कुछ करने को तैयार नहीं हैं. यह ठीक है कि दिवाली जैसे त्यौहार साल में एक बार आते हैं लेकिन सिर्फ़ एक दिन पटाखों से जो ज़हर हम वायुमंडल में घोल देते हैं उसकी कीमत साल भर ही नहीं लंबे समय तक चुकानी पड़ती है. समय आ गया है कि हम भी अपनी ज़िम्मेदारी समझें और स्वच्छ दिवाली की ओर बढ़ें.
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First published: October 28, 2019, 12:43 PM IST
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