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Corona संकट में घर लौटे कुमाऊं के प्रवासी लड़ेंगे मॉनसूनी आपदा से, दी जाएगी स्पेशल ट्रेनिंग

हर साल मॉनसून की बारिश के दौरान पहाड़ों में भूस्खलन, रपटों (पहाड़ी नालों) के उफ़ान में आने की वजह से बड़ा नुकसान होता है. (file photo)

हर साल मॉनसून की बारिश के दौरान पहाड़ों में भूस्खलन, रपटों (पहाड़ी नालों) के उफ़ान में आने की वजह से बड़ा नुकसान होता है. (file photo)

कुमाऊं कमिश्नर ने रेंज के सभी डीएम को आदेश दिया है कि COVID-19 संकट के दौरान घर लौटे प्रवासियों को आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग दें, ताकि आपदा राहत में उनसे मदद ली जा सके.

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नैनीताल. कोरोना संक्रमण (covid-19 pandemic) ने पूरे देश को संकट में डाला है मगर पहाड़ों में एक और आपदा की दस्तक ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है और वह है मॉनसून (monsoon). हर साल मॉनसून की बारिश के दौरान पहाड़ों में भूस्खलन (land slide), रपटों (पहाड़ी नालों) के उफ़ान में आने की वजह से बड़ा नुकसान होता. लेकिन पहाड़ी गांवों के दूर-दराज में होने की वजह से राहत और बचाव दल देरी से पहुंचते हैं. इस बार बड़ी संख्या में पहुंचे प्रवासियों (migrants) को राहत-बचाव की ट्रेनिंग देने की योजना तैयार की गई है ताकि आपदा वाले इलाकों में उन्हीं इलाकों के लोग राहत में मदद दे सकें.

क्या है प्लान

कुमाऊं कमिश्नर ने रेंज के सभी डीएम को आदेश दिया है कि वे अपने जिलों में प्रवासियों की लिस्ट तैयार करें कि कितने लोग अब तक पहाड़ लौटे हैं और वे कहां पर मौजूद हैं. इसके साथ ही सभी ज़िलाधिकारियों को आदेश दिया गया है कि प्रवासियों को आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग दें ताकि आपदा राहत में उनसे मदद ली जा सके.

कुमाऊं कमिश्नर और मुख्यमंत्री के सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी ने कहा सभी कि डीएम को कहा गया है प्रवासियों की मदद से एक वर्क फोर्स तैयार करें तो मुसीबत के वक्त ये लोग काम आ सकेंगे. इस पर भी रेंज में काम किया जा रहा है.

क्या करना है अधिकारियों को

दरअसल हर मॉनसून के दौरान पहाड़ों में आपदा जैसे हालात रहते हैं. पिछले कुछ सालों में पिथौरागढ़, बागेश्वर चंपावत, अल्मोड़ा ज़िले में लोगों को कई स्थानों पर आपदा का सामना करना पड़ा है. हालांकि इस बार आपदा में नुकसान और परेशानी को कम करने के लिए कुमाऊं कमिश्नर ने सभी डीएम को 15 जून तक सभी स्थानों पर राशन की व्यवस्था पूरी करने को कहा है. साथ ही दवा व उपचार के साधनों को भी रखने को कहा गया है.

इसके साथ ही ज़िलाधिकारियों को कहा गया है कि वे अपने ज़िलों में सैटेलाइट फ़ोन और अगर ज़रूरत हो तो आपदा मद से वॉकी-टॉकी खरीदें. लोक निर्माण विभाग को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे सभी ब्लैक स्पाँट चिन्हित करें और उन इलाकों में जेसीबी मशीनें तैनात करने के साथ अधिकारियों की ड्यूटी तय करें. सड़क टूटने की स्थिति में अन्य वैकल्पिक मार्गों की भी रेकी करें, चाहें वे पुराने पैदल मार्ग ही क्यों न हों.

आपदा के दौरान पानी से होने वाले नुकसान में पुलों के टूटने की दशा में ऐसे स्थानों में स्थाई व अस्थाई पुल बनाने का सामन भी रखें. कमिश्नर ने कहा है कि आमतौर पर विभागों में तालमेल की आने वाली कमियों को दूर करें ताकि आपदा राहत के वक्त नहीं एक दूसरे का इंतज़ार न करना पड़े.

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