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नैनीताल : कैलाश मानसरोवर जल के समान है 'नैनी झील का पानी', जानिए वजह

नैनीताल

नैनीताल की झील का आकार आम जैसा है.

नैनीताल की खोज करने वाले पीटर बैरन ने 1842 में इस झील में पहली बार नाव चलाई थी.

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    उत्तराखंड में वैसे तो बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थल हैं लेकिन सरोवर नगरी नैनीताल की बात ही कुछ और है. विदेशी सैलानियों की जुबान पर भी नैनीताल का नाम रहता है. अंग्रेजों ने नैनीताल को छोटी विलायत का दर्जा दिया था. नैनीताल के इतना मशहूर होने की एक वजह यहां स्थित नैनी झील भी है. दूरदराज से पर्यटक इस झील को देखने के लिए आते हैं.

    नैनी झील 7 पहाड़ियों- अयारपाटा, देवपाटा, हांडी बांडी, चीना पीक, आल्मा पीक, लड़िया कांटा और शेर का डांडा से घिरी है. नैनीताल की खोज करने वाले पीटर बैरन ने 1842 में इस झील में पहली बार नाव चलाई थी.

    सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नैनी झील की गहराई करीब 26 मीटर है. इसकी लंबाई करीब 2 किलोमीटर है. यह झील तल्लीताल से मल्लीताल को जोड़ती है. नैनीताल की सबसे ऊंची चोटी नैना पीक से देखने पर इस झील का आकार आम जैसा दिखाई देता है.

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