हाईकोर्ट ने लगाई रामनगर के 26 गांवों के पास व्यवसायिक गतिविधियों पर रोक

पिछले 12 साल में 27 हैक्टेयर ज़मीन को अकृषि में बदल दिया गया तो 3 साल में ही रामनगर के एसडीएम ने 26 हैक्टेयर भूमि का भू-उपयोग बदलकर 143 कर बिल्डरों पर मेहरबानी की.

News18 Uttarakhand
Updated: August 31, 2018, 7:12 PM IST
हाईकोर्ट ने लगाई रामनगर के 26 गांवों के पास व्यवसायिक गतिविधियों पर रोक
उत्तराखंड हाईकोर्ट (फ़ाइल फ़ोटो)
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Updated: August 31, 2018, 7:12 PM IST
रामनगर में नियमों को ताक पर रखकर बिल्डरों को फायदा पहुंचाने वाले अधिकारियों की अब खैर नहीं. आज उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने मामले को गम्भीर मानते हुए रामनगर के 26 गांवों के आस-पास व्यावसायिक गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए हैं. इसके साथ ही फल पट्टी में पेड़ काटने पर भी हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. हाई कोर्ट की खण्डपीठ ने पूरे मामले पर राज्य के मुख्य सचिव, उद्यान सचिव, डीएम नैनीताल, एसडीएम और ज़िला उद्यान अधिकारी को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.

बता दें कि अपूर्व जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर कहा है कि रामनगर के फलपट्टी 26 गांवों को फलपट्टी संरक्षण फलदार वृक्ष संवर्धन के तहत घोषित कर इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई थी. इसमें निजी आवास को छोड़कर कॉलोनी, उद्योग, व्यावसायिक को बैन किया था. मगर 2002 के बाद इसका उल्लंघन कर बगीचों में कॉलोनियों की अनुमति देकर 143 की कार्रवाई की गई.

याचिका के अनुसार पिछले 12 साल में 27 हैक्टेयर ज़मीन को अकृषि में बदल दिया गया तो 3 साल में रामनगर के एसडीएम ने 26 हैक्टेयर भूमि का भू-उपयोग बदलकर 143 कर बिल्डरों पर मेहरबानी की. इसके अलावा 5 माइनिंग स्टॉक को अनुमति दी गई तो 6 स्टोन क्रेशर को अनुमति दे गई गई. इसके अलावा पेड़ काटकर कई कॉलोनियों को भी बसने की भी अनुमति दे दी गई.

याचिका में कहा गया कि फलपट्टी के 26 गांवों के पास-पास 3 किलोमीटर में पड़ने वाले क्षेत्र बफ़र ज़ोन हैं जिसमें किसी तरह की व्यवसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती है. आज कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज तिवाड़ी की खंडपीठ ने रामनगर के इन 26 गांवों के आस-पास उद्योग, खनन स्टॉक, आवासीय कॉलोनियां के निर्माण पर रोक लगा दी.

(वीरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट)

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