हाईकोर्ट शिफ़्टिंगः 550 भी नहीं हुए रायशुमारी में शामिल, ज़्यादातर नैनीताल से शिफ़्ट करने के पक्ष में

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस रायशुमारी को बेमतलब बताते हुए कहा है कि वेबसाइट में राय देने वाले ख़ास इलाक़े के लोग हैं और हाईकोर्ट शिफ़्टिंग में उनके हित हैं.

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: July 29, 2019, 3:58 PM IST
हाईकोर्ट शिफ़्टिंगः 550 भी नहीं हुए रायशुमारी में शामिल, ज़्यादातर नैनीताल से शिफ़्ट करने के पक्ष में
उत्तराखण्ड हाईकोर्ट को नैनीताल से शिफ्ट करने का मामला फिर तूल पकड़ने लगा है. हाईकोर्ट ने लोगों की राय को सार्वजनिक कर अपनी वेबसाइट में डाल दिया है.
Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: July 29, 2019, 3:58 PM IST
उत्तराखण्ड हाईकोर्ट को नैनीताल से शिफ्ट करने का मामला फिर तूल पकड़ने लगा है. हाईकोर्ट ने लोगों की राय को सार्वजनिक कर अपनी वेबसाइट में डाल दिया है. 551 पेजों की इस रायशुमारी में 70% की राय हाईकोर्ट को नैनीताल से शिफ्ट करने के पक्ष में हैं. ज़्यादातर लोगों ने हल्द्वानी के रानीबाग में स्थित एचएमटी फैक्ट्री और रामनगर काशीपुर में भी हाईकोर्ट को शिफ्ट करने की राय दी है. दूसरी ओर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस रायशुमारी को बेमतलब बताते हुए कहा है कि इसमें 550 लोगों ने भी राय नहीं दी है और जिन्होंने दी है वह ख़ास इलाक़े के लोग हैं जिनके इसमें हित हैं.

अधिवक्ता एमसी कांडपाल ने उठाया था मामला 

हाईकोर्ट के अधिवक्ता एमसी काण्डपाल ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को हाईकोर्ट को नैनीताल से शिफ्ट करने का पत्र दिया था जिसके बाद चीफ जस्टिस ने इस पत्र को हाईकोर्ट की वेबसाइट में ड़ालकर लोगों से सुझाव मांगे थे. अब लोगों की राय मिल गई है तो उसको हाईकोर्ट ने अपनी वेबसाइट में शामिल कर लिया है.

पत्र देने वाले अधिवक्ता एमसी कांडपाल सुझाव दे रहे हैं कि इस स्थान पर नेशनल लॉ विश्वविद्यालय बना दिया जाए. हालांकि अब इस रायशुमारी पर हाईकोर्ट एक रिपोर्ट तैयार कर पीएमओ को सौंपेगा जिसके बाद इस संबंध में हाईकोर्ट को शिफ़्ट करने या न करने पर आधिकारिक रूप से कोई चर्चा हो पाएगी.

1.1 करोड़ की आबादी, 550 भी नहीं बोले 

हालांकि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन इस फैसले का लगातार विरोध कर रहा है. हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पूरन सिंह बिष्ट कहते हैं कि 551 पन्नों में 550 लोगों ने भी सुझाव नहीं दिए हैं. 1.1 करोड़ से ज़्यादा लोगों वाले राज्य में इनकी राय को किसी बात का, वह भी हाईकोर्ट शिफ़्ट करने को, आधार बनाना बेमतलब है.

बिष्ट कहते हैं कि वेबसाइट में सुझाव देने वाले से इन लोगों पर कोई  सुझाव देने वाले लोग ज़्यादातर रामनगर, पीरुम्बदारा, काशीपुर, बाजपुर के हैं. हाईकोर्ट शिफ़्ट होने से इन लोगों के व्यवसायिक और निजी हित सधते हैं. वह कहते हैं कि हाईकोर्ट शिफ़्ट होने को लेकर पिथौरागढ़, चंपावत, रुद्रप्रयाग, चमोली के लोगों की राय आती तो बात समझी जा सकती थी कि राज्य के सभी लोगों की राय आई है लेकिन ऐसा नहीं है.
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First published: July 29, 2019, 3:48 PM IST
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