स्टोन क्रशर पर ‘मेहरबानियों’ पर हाईकोर्ट ने उठाए ये सवाल, सरकार से एकल हफ़्ते में मांगा जवाब

राज्य सरकार ने बीते एक साल में राज्य प्रदूषण बोर्ड की अनुमति के बिना ही 54 से ज्यादा स्टोन क्रशर खोलने की अनुमति जारी की है.

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: July 31, 2019, 3:55 PM IST
स्टोन क्रशर पर ‘मेहरबानियों’ पर हाईकोर्ट ने उठाए ये सवाल, सरकार से एकल हफ़्ते में मांगा जवाब
राज्य में सरकार द्वारा दी जा रही स्टोन क्रशरों की अनुमति पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. (फ़ाइल फ़ोटो)
Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: July 31, 2019, 3:55 PM IST
राज्य में सरकार द्वारा दी जा रही स्टोन क्रशरों की अनुमति पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. राज्य सरकार ने बड़ी संख्या में स्टोन क्रशर को नियमों को ताक पर रखकर अनुमति दे दी थी. हाईकोर्ट ने इस पर सख़्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और राज्य प्रदूषण बोर्ड को एक हफ़्ते के भीतर अपना जवाब शपथ पत्र में दाखिल करने को कहा है.

संरक्षित ज़ोन में भी दी इजाज़त 

बता दें कि राज्य सरकार ने बीते एक साल में राज्य प्रदूषण बोर्ड की अनुमति के बिना ही 54 से ज्यादा स्टोन क्रशर खोलने की अनुमति जारी की है. सरकार के इस फैसले को आनंद नेगी व अन्य ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की है.

याचिका में कहा गया है कि सरकार ने मानकों को ताक पर रखकर 54 स्टोन क्रशरों की अनुमति दी गई है जिसमें से कई को अनुमति संरक्षित जोन गंगोत्री नेशनल पार्क में तक दी गई है.

ध्वनि प्रदूषण की सीमा क्यों बढ़ाई 

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक हफ़्ते में यह बताने को कहा है कि उसने जो स्टोन क्रशर को अनुमति दी है उसकी अनुमति राज्य प्रदूषण बोर्ड से ली थी या नहीं.

हाईकोर्ट ने यह भी पूछा है कि जब आवासीय आबादी के लिए ध्वनि प्रदूषण की सीमा 55 डेसिबल रखी गई है तो इन स्टोन क्रशर को 75 डेसिबल तक ध्वनि प्रदूषण करने की इजाज़त इन स्टोन क्रशर को दी गई है.
Loading...

Facebook पर उत्‍तराखंड के अपडेट पाने के लिए कृपया हमारा पेज Uttarakhand लाइक करें
First published: July 31, 2019, 3:49 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...