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नैनीताल की झील को घेरे हैं 62 नाले, ब्रिटिशकाल में एक बड़ा हादसा था निर्माण की वजह

इतिहासकार और पर्यावरणविद डॉ अजय रावत ने बताया कि आज भी इन 62 नालों में से कई नालों के ऊपर अतिक्रमण हो रहा है या हो गया है, जो नैनीताल के भविष्य के लिए खतरे की घंटी है.

    (रिपोर्ट- हिमांशु जोशी)

    नैनीताल. सरोवर नगरी नैनीताल आज पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. नैनीताल देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है. दुनिया के कोने-कोने से पर्यटक यहां की झील (Nainital Lake History) का दीदार करने के लिए आते हैं. नैनी झील के चारों ओर 62 नालों का समूह देखने को मिलता है, जो ब्रिटिशकाल के बने हुए हैं. देखने में तो यह नाले सामन्य नालों की तरह ही दिखते हैं लेकिन इनके निर्माण की वजह अतीत में हुआ एक भयानक हादसा रहा है. अगर सही मायने में ये नाले न हों, तो आज जैसी दिखने वाली यह नगरी शायद ऐसी कभी होती ही नहीं.

    इतिहासकार और पर्यावरणविद डॉ अजय रावत ने बताया कि साल 1841 में अंग्रेज पहली बार नैनीताल आए थे. इससे पहले यह केवल तीर्थस्थल के नाम से जाना जाता था. अंग्रेजों ने यहां नगरीकरण करना शुरू किया और धीरे-धीरे अलग-अलग जगह से लोग यहां आकर बसने लगे. 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद से कई अंग्रेजों ने यहां शरण ली थी और उसके बाद से यह नगर भी जाना जाने लगा. नगर के बसने के कुछ वर्षों के बाद साल 1867 में यहां पहला भूस्खलन हुआ, जो कि वर्तमान के चार्टन लॉज की पहाड़ी पर हुआ था. तब कुमाऊं के कमिश्नर रहे सर हेनरी रैमजे ने हिल साइड सेफ्टी कमेटी का गठन किया, जो नैनीताल के संवेदनशील इलाकों के बारे में जानकारी जुटाती थी.

    इसके बाद साल 1880 में नैनीताल में एक भयानक भूस्खलन हुआ, जिसमें 151 लोगों की मौत हुई थी. इस भूस्खलन के होने के पीछे की वजह उस दौरान हुई भयानक बारिश रही. उस दौरान करीब 48 घंटों तक लगातार 20 इंच से 35 इंच तक बारिश हुई थी. इसके बाद हिल साइड सेफ्टी कमेटी की तरफ से झील के चारों ओर 79 किमी लंबाई के नालों का निर्माण किया गया, जिससे बारिश का पानी सीधा नालों से बहकर झील में चला जाए और कोई नुकसान न हो. साल 1880 से 1885 तक इन नालों के निर्माण का काम चलता रहा. इसके बाद से नैनीताल में कुछ भूस्खलन हुए लेकिन कभी भी कोई खतरनाक भूस्खलन नैनीताल में फिर देखने को नहीं मिला, जिससे ज्यादा नुकसान पहुंचा हो. इन 62 नालों को अगर नैनीताल की लाइफलाइन भी कहें तो यह गलत नहीं होगा.

    अतिक्रमण से नैनीताल के भविष्य को खतरा?
    साल 1990 तक लोगों ने इन नालों पर अतिक्रमण करना शुरू कर दिया था. डॉ अजय रावत ने इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में याचिका दायर की है और कोर्ट के आदेशानुसार नालों पर हुए अतिक्रमण को हटाया जा चुका है. 5 जुलाई, 2015 को नैनीताल में भारी बारिश देखने को मिली थी. उस दौरान बड़ी मात्रा में पहाड़ी से मलबा इन्हीं नालों के रास्ते से होकर नैनीताल माल रोड पर इकठ्ठा हो गया था. अगर यह नाले न होते तो शायद आज नैनीताल का नक्शा पूरा बदल ही गया होता. तब के जिलाधिकारी दीपक रावत की तरफ से डॉ अजय रावत को उनकी इस जागरूकता के लिए प्रशंसा पत्र भेजा गया था. डॉ अजय रावत का कहना है कि आज भी इन 62 नालों में से कई नालों के ऊपर अतिक्रमण हो रहा है या हो गया है, जो नैनीताल के भविष्य के लिए खतरे की घंटी है.

    Tags: Nainital news, Nainital tourist places

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