लॉकडाउन के चलते नैनीताल पालिका का खजाना हुआ खाली, सरकार से मांगी मदद
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लॉकडाउन के चलते नैनीताल पालिका का खजाना हुआ खाली, सरकार से मांगी मदद
दरअसल, पालिका को पार्किंग टोल टैक्स और नाव चालन समेत अन्य मदों से राजस्व मिलता है.

नैनीताल पालिका (Nainital Municipality) को करीब 4 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है. अब पालिका हाउस टैक्स व दुकानों का किराया बढ़ाकर इस नुकसान को पूरा करने की योजना तैयार कर रही है.

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नैनीताल. लॉकडाउन (Lockdown) में नैनीताल पालिका (Nainital Municipality) को करीब 4 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो गया है. कर्मचारियों की सैलरी और नुकसान की भरपाई के लिए नैनीताल पालिका ने अब राज्य सरकार से मदद मांगी है. साथ ही पालिका आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए पालिका के आवासों व दुकानों के किराये में बढ़ोतरी करने जा रही है. दरअसल, लॉकलाउन के बाद से ही पालिका के आय के साधन बंद हो गये हैं, जिसके बाद भी पालिका ने अपने कर्मचारियों को 2 महीने का वेतन (Salary) दिया है. अब आने वाले महीनों में  कर्मचारियों की दिक्कतें और भी बढ़ सकती हैं.

दरअसल, पालिका को पार्किंग टोल टैक्स और नाव चालन समेत अन्य मदों से राजस्व मिलता है. मगर इस बार लॉकडाउन से सभी बंद हैं, जिसके चलते भारी नुकसान हुआ है. हांलाकि, पालिका अब हाउस टैक्स व दुकानों का किराया बढ़ाकर इस नुकसान को पूरा करने की योजना तैयार कर रही है.

होती है कमई तो मिलती है सैलरी
नैनीताल पालिका के पास आय के लिये पार्किंग और टोल टैक्स जैसे बड़े साधन हैं. इन दोनों के टेंडर से नैनीताल पालिका को करिब 3 करोड़ से ज्यादा की आय होती है. इसके साथ ही झील में बोटिंग से भी कुछ अंश पालिका को मिलता है. वहीं, अन्य छोटे कामकाज से भी पालिका की आय होती है. पालिका अपने रिटायर्ड़ कर्मचारियों व वर्तमान कर्मचारियों को इसी पैसे से सैलरी व अन्य भत्ते देती है. लेकिन अब सभी आय के साधन बंद होने से कर्मचारियों की तनख्वा देनी भी मुश्किल हो गई है.
सरकार से नहीं मिली राहत तो जनता पर पड़ेगी मार


नैनीताल पालिका ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि उनके नुकसान की भरपाई की जाए ताकि 350 से ज्यादा  कर्मचारियों को तनख्वा दी जा सके. पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी ने कहा कि अगर सरकार से राहत नहीं मिलती है तो पालिका अपने आय के साधनों से पैसा एकत्र करेगी. पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी कहतें हैं कि पालिका विचार कर रही है कि उनके दुकानों व आवास टैक्स जो सालों से नहीं बढे हैं उसको बढ़ाया जाए. साथ ही जो उनके आवास मामूली किराए पर हैं, उनका किराया नए मानकों में तय की जाए.

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