होम /न्यूज /उत्तराखंड /

Nainital: नौकुचियाताल के इस प्राचीन मंदिर का आज तक नहीं हो सका भव्य निर्माण, किसी की हिम्मत ही नहीं हुई!

Nainital: नौकुचियाताल के इस प्राचीन मंदिर का आज तक नहीं हो सका भव्य निर्माण, किसी की हिम्मत ही नहीं हुई!

भगवान शिव, पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की आकृति शिला रूप में यहां देखी जा सकती हैं. यहां भक्तों के लिए पूजा पाठ, कीर्तन भजन, पानी, शौचालय और रहने की उचित व्यवस्था है. यहां अक्सर अखंड रामायण, सुंदरकांड, भजन और भंडारा होता रहता है. देखिए इस मंदिर की अनूठी कहानी.

अधिक पढ़ें ...

रिपोर्ट – हिमांशु जोशी

नैनीताल. देवों की भूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड के लोग देवी.देवताओं में बड़ी आस्था रखते हैं. यहां ऋषि मुनियों, तपस्वियों, सिद्ध पुरुषों और विद्वानों की एक अहम जगह सदियों से रही है. उन्हीं जाग्रत देवस्थानों और शक्तिपीठों में से एक है नैनीताल जिले के नौकुचियाताल के पास शिलौटी गांव में स्थित मां घंटा देवी का एक प्राचीन मंदिर. गांव के लोगों के अनुसार इस स्थान पर कई बार माता का भव्य मंदिर निर्माण करने की कोशिश की गई लेकिन माता की आज्ञा न मिलने से कोई भी इस मंदिर के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करने की हिम्मत नहीं कर सका.

मां घंटा देवी सभी भक्त जनों को निरोगी रखने, जानवरों की रक्षा करने और भक्तों के दुख का निवारण कर तुरंत ही फल देने वाली मानी जाती हैं. यहां तक कि माता ने कई बार अपनी कृपा और उपस्थिति का एहसास भी अपने भक्तों को समय-समय पर कराया है. नैनीताल शहर से लगभग 30 किमी की दूरी पर मौजूद इस मंदिर तक पहुंचने के लिए शहर से 26 किमी दूर नौकुचियाताल से होते हुए शिलौटी गांव तक जाना होता है. वहां से करीब डेढ़ किमी जंगल से होते हुए पैदल मार्ग से माता के दरबार तक पहुंचा जा सकता है.

क्या कुछ खास है इस मंदिर में?

मंदिर में मां घंटा देवी शिला के रूप में विद्यमान हैं. देवी स्थल के बाहर भैरव देवता भी शिला रूप में विराजमान हैं. कहा जाता है कि मां घंटा देवी इस जंगल में वनदेवी के रूप में भी मौजूद हैं. माता के मंदिर में बलि देने की प्रथा नहीं है. यहां गंगाजल, दूध से स्नान करा कर पूजा की जाती है. इस स्थान पर अलग अलग पत्थरों पर अलग अलग आकृतियां भी देखी जा सकती हैं. पत्थर के रूप में माता का वाहन शेर, भैंस के रूप में महिषासुर और उस पर नृत्य करती माता के पैरों के निशान भी यहां दिखाई देते हैं, जो महिषासुर मर्दनी का स्वरूप है.

यहां वातावरण काफी सुंदर और शांत है. ब्राह्मी, अश्वगंधा, दूना, पीपल, कड़ी पत्ता जैसी वनस्पतियां भी यहां मौजूद हैं. यह मंदिर घने जंगल के बीच में है. यह हमेशा खुला ही रहता है जिस वजह से यहां कभी भी कोई भी जाकर माता के दर्शन कर सकता है. नवरात्रि के दौरान यहां माता की पूजा अर्चना की जाती है और स्थानीय लोग भंडारे का आयोजन करते हैं.

Tags: Hindu Temple, Nainital news

अगली ख़बर