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अब बिजलीकर्मियों के बिजली इस्तेमाल पर रहेगी नज़र... मीटर हुआ ज़रूरी, रेट तय करने को एक महीने की मोहलत

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: December 2, 2019, 5:28 PM IST
अब बिजलीकर्मियों के बिजली इस्तेमाल पर रहेगी नज़र... मीटर हुआ ज़रूरी, रेट तय करने को एक महीने की मोहलत
नैनीताल हाईकोर्ट में यूपीसीएल के एमडी बीसीके मिश्रा ने कहा कि वे सभी कर्मचारियों और पूर्व कर्मचारियों के घरों में दिसंबर महीने तक मीटर लगा देंगे. (फ़ाइल फ़ोटो)

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि बिजली विभाग के कर्मचारियों को मुफ्त बिजली देने का कोई प्रावधान ही नहीं है. इस पर कोर्ट अगली तारीख पर सुनवाई करेगा.

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नैनीताल. राज्य में बिजली कर्मचारियों के लिए मीटर लगाना अनिवार्य हो गया है. आज कोर्ट में यूपीसीएल के एमडी बीसीके मिश्रा ने कहा है कि वे सभी कर्मचारियों और पूर्व कर्मचारियों के घरों में दिसंबर महीने तक मीटर लगा देंगे. जो नहीं लगाएगा तो उसकी तनख्वाह रोक दी जाएगी. यूपीसीएल एमडी ने बिजली के रेट तय करने को लेकर तीनों निगमों की बैठक होने का हवाला दिया जिस पर कोर्ट ने एक महीने का समय दे दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि वह सारी कार्रवाई की रिपोर्ट 6 जनवरी को कोर्ट में पेश करें.

जनहित याचिका 

बता दें कि आरटीआई क्लब उत्तराखण्ड ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर राज्य में लगातार बिजली की दरें बढ़ाए जाने को चुनौती दी है. इसके साथ ही बिजली कर्मचारियों को मुफ़्त बिजली दिए जाने को भी चुनौती दी है और कहा है कि इसी की वजह से उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी की जा रही है. याचिका में कहा गया है कि विभाग अपने कर्मचारियों को लगभग मुफ़्त बिजली देता है.

जनहित याचिका के अनुसार उच्च अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विभाग ने अधिकतम 500 और 100 से रुपये बिल तय किया है. बिजलीकर्मी चाहे कितनी भी बिजली खर्च करें उन्हें इससे ज़्यादा बिल नहीं देना होता. यह भी कहा गया कि यूपीसीएल के एक जीएम ने एक महीने में 92000 यूनिट बिजली खर्च की, जिसका बिल एक लाख रुपये से ऊपर होता है लेकिन उन्होंने जमा किए सिर्फ़ 425 रुपये.

नई बहस शुरु 

याचिका में यह भी कहा गया है कि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के घरों में जो मीटर लगे हैं या तो वे खराब हैं या फिर हैं ही नहीं. यह भी कहा गया कि बिजलीकर्मी जो बिजली खर्च कर रहे हैं उसका पैसा भी जनता से ही लिया जा रहा है. याचिका में इस फर्जीवाड़े और बिजली घोटाले को बंद करने की मांग की गई है.

आज सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में नई बहस शुरु की. उन्होंने कहा कि बिजली विभाग के कर्मचारियों को मुफ्त बिजली देने का कोई प्रावधान ही नहीं है. इस प्रावधान पर कोर्ट अगली तारीख पर सुनवाई करेगा.ये भी देखें: 

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First published: December 2, 2019, 2:15 PM IST
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