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हाईकोर्ट ने लगाई UP-उत्तराखंड के साथ केंद्र के अधिकारी को फटकार, नहीं दे पाए सवाल का जवाब
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Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: February 24, 2020, 6:01 PM IST
हाईकोर्ट ने लगाई UP-उत्तराखंड के साथ केंद्र के अधिकारी को फटकार, नहीं दे पाए सवाल का जवाब
उत्तराखंड रोडवेज़ कर्मचारियों को तीन महीने से तनख्वाह न मिलने के मामले में पर केन्द्र सरकार के अपर सचिव परिवहन सुदीप दत्ता हाईकोर्ट पेश हुए.

कोर्ट ने कहा कि केन्द्र सरकार के चुप रहने और यूपी परिवहन निगम द्वारा पैसा न दिये जाने पर राज्य के रोडवेज़ कर्मचारी भूखे मर रहे हैं.

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नैनीताल. उत्तराखंड हाईकोर्ट में सोमवार को फिर आधी-अधूरी तैयारी की वजह से केंद्र, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अधिकारियों को फटकार लगी. उत्तराखंड रोडवेज़ कर्मचारी यूनियन की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पिछली तारीख में पेश न होने पर केंद्र सरकार के परिवहन विभाग के अपर सचिव की गिरफ़्तारी के लिए ज़मानती वारंट तक जारी कर दिया था. सोमवार को वह पेश तो हुए लेकिन कोर्ट के सवाल के जवाब नहीं दे पाए और फिर कोर्ट ने इस पर नाराज़गी जताई.

23 मार्च को देनी होगी रिपोर्ट 

उत्तराखंड रोडवेज़ कर्मचारियों को तीन महीने से तनख्वाह न मिलने के मामले में पर केन्द्र सरकार के अपर सचिव परिवहन सुदीप दत्ता हाईकोर्ट पेश हुए. उन्होंने कोर्ट में शपथ पत्र दिया कि दोनों राज्यों में पैसे को लेकर सहमति बनी है.



इस पर कोर्ट ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार दोनों राज्यों के सचिवों के बीच एक महीने के भीतर बैठक कराए और निर्णय लेने की प्रक्रिया शुरू करें. कोर्ट ने 23 मार्च को शपथ पत्र के साथ पूरी कार्रवाई रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है.



हाईकोर्ट की नाराज़गी 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केन्द्र सरकार के अपर सचिव की बातों पर तल्ख टिप्पणी की कि केन्द्र सरकार के चुप रहने और यूपी परिवहन निगम द्वारा पैसा न दिये जाने पर राज्य के रोडवेज़ कर्मचारी भूखे मर रहे हैं.

कोर्ट में भारत सरकार के अपर सचिव ने कहा कि 8.27 करोड़ रुपये दिए गए हैं. इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता एम सी पंत ने विरोध किया. उन्होंने कहा कि 8.27 करोड़ रुपये एडीशनल पैसेंजर टैक्स है जो यूपी को देना है और कोर्ट को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है.

पंत के अनुसार, हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या यह पैसा दे दिया गया है? इस पर न तो यूपी सरकार, न उत्तराखंड सरकार, न उत्तराखंड परिवहन निगम और न ही केंद्र सरकार कोई जवाब दे पाए. इस पर हाईकोर्ट ने नाराज़गी व्यक्त की.

यह है मामला 

बता दें कि तीन महीने से तनख्वाह न मिलने पर रोडवेज़ कर्मचारी यूनियन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि यूपी परिवहन निगम ने उत्तराखंड परिवहन निगम को 800 करोड़ रुपये देने हैं. इसके अलावा राज्य सरकार पर भी विभिन्न योजनाओं में बसों के इस्तेमाल के लिए 68 लाख रुपये की देनदारी है.

याचिका में कहा गया है कि जब भी कर्मचारी तनख्वाह की मांग करते हुए हड़ताल करते हैं तो सरकार उन पर एस्मा की कार्रवाई करती है जो न्यायसंगत नहीं है.

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First published: February 24, 2020, 4:10 PM IST
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