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OMG: शिवलिंगों ने चेताया, 2020-22 में भयंकर सूखा

News18India
Updated: December 7, 2017, 4:01 PM IST
OMG: शिवलिंगों ने चेताया, 2020-22 में भयंकर सूखा
उत्तराखंड में मौजूद प्राकृतिक शिवलिंगों ने 2020-22 में भयंकर सूखे की भविष्यवाणी की है.
News18India
Updated: December 7, 2017, 4:01 PM IST
उत्तराखंड में मौजूद प्राकृतिक शिवलिंगों ने 2020-22 में भयंकर सूखे की भविष्यवाणी की है. ख़ासबात ये है कि यह भविष्यवाणी किसी पंडित या भविष्यवेत्ता ने नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों ने की है.

रानीखेत के करीब द्वाराहाट के सुदूर जंगलों में मौजूद गुफाओं में मिले शिवलिंगों ने तीन से पांच साल में बड़े सूखे की आशंका ज़ाहिर की है.

दरअसल नैनीताल में स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में इन प्राकृतिक शिवलिंगों को लेकर शोध चल रहा है. इसी शोध के दौरान ये चौंकाने वाली रिसर्च सामने आई.

शोध में किया गया दावा 

इस शोध में पता चला कि गुफ़ाओं में प्राकृतिक रूप से बने इन शिवलिंगों में मौसम का भूत और भविष्य दोनों छिपा हुआ है. लखनऊ के रहने वाले और कुमाऊं विश्वविद्यालय में सीनियर रिसर्च फैलो डॉक्टर अनूप कुमार सिंह ने शोध के दौरान मिली जानकारी के आधार पर यह दावा किया है.

डॉक्टर अनूप के अनुसार हिमालय की गुफ़ाओं में प्राकृतिक रूप से बनने वाले शिवलिंग (स्टेलेग्माइट) को लैबोरेट्री में लाकर उन पर कई तरह के परीक्षण किए जाते हैं. डॉक्टर अनूप की टीम के पास हालिया शिवलिंग 330 साल पुराना है.

उसके अध्ययन से उन्हें पता चला कि बीते 330 साल में उत्तर भारत में 26 बार भारी सूखा पड़ा. इस चक्र के अनुसार 2020 और 2022 में उत्तर भारत में फिर गंभीर सूखा पड़ सकता है. इस शोध के लिए डॉक्टर अनूप को उत्तराखंड के राज्यपाल सम्मानित भी कर चुके हैं.

शिवलिंग में बदलावों से दावों की पुष्टि

डॉक्टर अनूप अपने दावे का वैज्ञानिक आधार भी बता रहे हैं. फिर भी पुष्टि के लिए न्यूज़ 18 की टीम पहुंची कुमाऊं विश्वविद्यालय में भूविज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉक्टर चारु पंत के पास.

प्रोफेसर पंत से जब इस बारे में हमने सवाल किया तो उन्होंने अध्ययन का समर्थन किया. उन्होंने बताया कि डॉक्टर अनूप के शोध के आधार पर इतिहास में मौसमी घटनाओं का मिलान किया गया तो शिवलिंग में दर्ज बदलावों से उनकी पुष्टि हुई है.

प्रोफ़ेसर पंत कहते हैं कि अब विभाग इस पर और अध्ययन कर रहा है कि क्या यह एक चक्र है. अगर हां तो क्या इसके आधार पर भविष्यवाणी की जा सकती है?

अब तक यह बात तो साफ़ हो गई है कि प्रकृति ने स्वाभाविक रूप से बने इन शिवलिंगों में मौसम के बदलाव को दर्ज किया है. बस अब इसकी भाषा समझ आनी चाहिए, डॉक्टर अनूप जिसमें सफल होते दिख रहे हैं.

(नैनीताल से शैलेंद्र नेगी की रिपोर्ट)

 
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