जंगली मशरूम खाने से रानीखेत के एक युवक की मौत, ग्राम प्रधान समेत दो की हालत गंभीर
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जंगली मशरूम खाने से रानीखेत के एक युवक की मौत, ग्राम प्रधान समेत दो की हालत गंभीर
प्राकृतिक तरीके से जंगल में उगे मशरूम खाने से एक युवक की मौत हो गई और दो गंभीर हैं.

वन अनुसंधान केंद्र के प्रभारी रेंजर मदन सिंह बिष्ट के मुताबिक जंगलों में लाखों किस्म की जड़ी-बूटी मौजूद हैं लेकिन इनकी सही तरह से पहचान बेहद ज़रूरी है.

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हल्द्वानी. जंगल प्राकृतिक चीजों से भरे पड़े हैं जिनमें जड़ी-बूटियों से लेकर हरी साग-सब्जियां तक शामिल हैं लेकिन इनकी पहचान होना ज]रूरी है. पहचान न होने पर यही प्राकृतिक चीज़ें जानलेवा साबित हो सकती हैं. ऐसा ही हुआ रानीखेत के तीन लोगों के साथ. प्राकृतिक तरीके से जंगल में उगे मशरूम खाना इनकी जिंदगी पर भारी पड़ गया है. इसके कारण जिन तीन लोगों ने मशरूम खाया उसमें से एक की मौत हो गई है जबकि दो की हालत गंभीर बनी हुई है. इन्हें हल्द्वानी से सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है. बेस अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर हरीश लाल के मुताबिक तीनों मरीज बेस अस्पताल लाए गए थे जिनमें से एक मरीज़ की मौत हो गई है जबकि दो को आईसीयू में रखा गया है.

रानीखेत में खाया जहरीला मशरूम

रानीखेत के भिकियासैंण ब्लॉक के गांव नौबड़ा के रहने वाले ग्राम प्रधान समेत तीन युवकों ने बीते शुक्रवार को घर में जंगली मशरूम की सब्ज़ी बनाई थी. कुछ देर बाद इन्हें चक्कर के साथ उल्टी और दस्त शुरू हो गए. इस पर ग्रामीण तीनों लोगों को लेकर रानीखेत के नजदीकी अस्पताल पहुंचे. जहां डॉक्टरों ने इनकी हालत देखने के बाद इन्हें हल्द्वानी रेफर कर दिया गया.



​ग्रामीण तीनों बीमारों को हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल पहुंचे जहां तीन दिन तक इलाज चलता रहा. वहां इलाज का खर्च अधिक होने के कारण तीनों सरकारी बेस अस्पताल आ गए जहां इनके एक साथी की मौत हो गई.
ज़हरीला जंगली मशरूम खाने से बीमार हुए ग्राम प्रधान नवीन पुरोहित ने बताया कि उनके साथी मोहन मिश्रा की मौत हो गई. ग्राम प्रधान के मुताबिक मोहन को मशरूम की अच्छी पहचान थी. वह हर साल बरसात के मौसम में जंगलों से मशरूम लेकर आता था और उसे हम खाया करते थे. लेकिन शुक्रवार को लाया मोहन का मशरूम ज़हरीला निकला जिससे हम तीनों की तबियत खराब हो गई.

सही पहचान ज़रूरी

ग्राम प्रधान गांव का मुखिया होता है. जंगली मशरूम का स्वाद उन पर भी भारी पड़ गया. वन अनुसंधान केंद्र के प्रभारी रेंजर मदन सिंह बिष्ट के मुताबिक जंगलों में लाखों किस्म की जड़ी-बूटी मौजूद हैं लेकिन इनकी सही तरह से पहचान बेहद ज़रूरी है.

बिष्ट कहते हैं कि इनकी सही पहचान वाले शख्स को ही इनका इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि बरसात के मौसम में कुकुरमुत्तानुमा बहुत सारी चीजें जंगल में उग आती हैं. इसलिए बहुत ध्यान से, सही पहचान के बाद ही इन्हें खाएं.
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