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जमरानी बांध निर्माण को लेकर एक और नोटिस... हाईकोर्ट ने यूपी-उत्तराखंड के सचिवों से 3 हफ़्ते में जवाब मांगा

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: November 6, 2019, 2:57 PM IST
जमरानी बांध निर्माण को लेकर एक और नोटिस... हाईकोर्ट ने यूपी-उत्तराखंड के सचिवों से 3 हफ़्ते में जवाब मांगा
1975 में शुरु हुई जमरानी बांध परियोजना का काम सालों से लटका हुआ है. (फ़ाइल फ़ोटो)

याचिकाकर्ता रविशंकर जोशी (Ravishankar joshi) कहते हैं कि खनन लॉबी (Mininig) इस परियोजना (Jamrani Project) को ज़मीन पर नहीं उतरने दे रही है.

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नैनीताल. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लिए बेहद महत्वपूर्ण गौला नदी पर बनने वाले जमरानी बांध निर्माण के लिए उत्तराखण्ड और केंद्र के बाद यूपी के मुख्य सचिव को उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है. हाईकोर्ट की एकलपीठ ने पूछा है कि जमरानी बांध निर्माण को लेकर अब तक क्या कार्रवाई की गई है. कोर्ट ने यूपी-उत्तराखंड के मुख्य सचिवों को तीन हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.

अवमानना का नोटिस 

बता दें कि हल्द्वानी के रविशंकर जोशी की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने 2 नवंबर, 2018 को आदेश दिया था कि तीन महीने के अंदर सभी औपचारिक्ताएं पूरी कर जमरानी बांध के लिए कार्य शुरु करें. कोर्ट ने उत्तराखण्ड और यूपी के मुख्य सचिव को आदेश दिया था कि एक महीने के भीतर वे एक प्रपोजल बनाकर केन्द्र सरकार को भेजें और 6 महीने के भीतर बांध निर्माण का कार्य शुरु करें.

10 महीने तक काम शुरु नहीं हुआ तो रविशंकर जोशी ने 26 सितंबर को अवमानना याचिका दायर की. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यूपी और केंद्र सरकार को तीन हफ़्ते में जवाब दाखिल करने को कहा. आज इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में कहा गया कि इस मामले में उत्तर प्रदेश से भी जवाब तलब किया जाना चाहिए. जिसके बाद हाईकोर्ट ने यूपी के मुख्य सचिव को भी नोटिस जारी किया.

बढ़ती गई लागत 

साल 1975 में गौला नदी पर स्वीकृत जमरानी बांध उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के लिए बहुत महत्वपूर्ण योजना है. 1975 में इसकी लागत 61.25 करोड़ थी जिसके तहत साल 1982 में फ़र्स्ट फ़ेज़ का काम भी हुआ जिसके तहत ल गौला बैराज के निर्माण के साथ 40 किलोमीटर नहरें बनी थीं.

1988 में केन्द्र के जल बोर्ड से इसकी अनुमति मिली लेकिन तब तक बांध निर्माण की लागत 144.84 करोड़ हो गई. 2015 में डीपीआर फिर बनी तो ये लागत 2350.56 करोड़ हो गई.
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खनन माफ़िया ने लटकाई परियोजना 

याचिकाकर्ता रविशंकर जोशी का कहना है कि बांध को लेकर यूपी और उत्तराखण्ड के बीच समझौता नहीं हो सका जिसके चलते हर साल नुकसान हो रहा है. जोशी कहते हैं कि खनन लॉबी इस परियोजना को ज़मीन पर नहीं उतरने दे रही है.

जोशी कहते हैं कि उन्होंने याचिका में भी यह बात उठाई है कि गौला नदी में होने वाले खनन की वजह से इस परियोजना में देरी हो रही है क्योंकि इसका नोटिफ़िकेशन होते ही इसके प्रभाव क्षेत्र में खनन और व्यवसायिक गतिविधियों पर रोक लग जाएगी. जोशी कहते हैं बहुत से प्रभावशाली नेताओं, अधिकारियों माफ़िया के हित होने की वजह यह परियोजना 44 साल से लटकी हुई है.

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First published: November 6, 2019, 1:33 PM IST
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