पूर्व मुख्यमंत्रियों को मुफ़्त सुविधाओं के अध्यादेश को हाईकोर्ट में चुनौती, वकील ने कहा यूपी का अध्यादेश भी हो चुका है निरस्त

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: September 11, 2019, 7:16 PM IST
पूर्व मुख्यमंत्रियों को मुफ़्त सुविधाओं के अध्यादेश को हाईकोर्ट में चुनौती, वकील ने कहा यूपी का अध्यादेश भी हो चुका है निरस्त
पूर्व मुख्यमंत्रियों के बकाया मामले पर राज्य सरकार के अध्यादेश को हाईकोर्ट में चुनौती मिली है. (फ़ाइल फ़ोटो)

पूर्व मुख्यमंत्रियों से बंगलों, गाड़ियों के बाज़ार भाव से पैसे वसूलने के हाईकोर्ट के आदेश को भगत सिंह कोश्यारी और विजय बहुगुणा ने चुनौती दी थी लेकिन यह खारिज हो गई थी.

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पूर्व मुख्यमंत्रियों के बकाया मामले (Ex CMs Due Case) पर उत्तराखंडसरकार (Uttarakhand Government) के अध्यादेश (Ordinance) को हाईकोर्ट में चुनौती (Challenged in High Court) मिली है. अध्यादेश को असंवैधानिक (Unconstitutional) घोषित करने को लेकर याचिकाकर्ता अवधेश कौशल (Awdhesh Kaushal) ने हाईकोर्ट में फिर याचिका दाखिल की है. याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार जो अध्यादेश लाई है वह संविधान के आर्टिकल 14 और 21 (Constitu) के विपरीत है. दरअसल याचिकाकर्ता ने सरकार के अध्यादेश को इसलिए चुनौती दी क्योंकि राज्य सरकार ने नैनीताल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (Division Bench) के पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी सुविधाओं का सरकारी भाव (Market Rate) से पैसा वसूलने के आदेश को इस अध्यादेश से निष्प्रभावी कर दिया था.

यह था हाईकोर्ट का आदेश 

बता दें कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 3 मई, 2019 को जारी अपने आदेश में कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री बाजार भाव से बंगले, गाड़ी आदि सभी सुविधाओं का किराया वहन करेंगे. हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि 6 महीने के दौरान सभी पैसा जमा करें और अगर ऐसा नहीं करते हैं तो सरकार इनके खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरु करें.

हाईकोर्ट के इस आदेश को दो पूर्व मुख्यमंत्रियों भगत सिंह कोश्यारी और विजय बहुगुणा ने चुनौती भी दी थी लेकिन उनकी चुनौती खारिज हो गई. इसके बाद राज्य सरकार के लिए इन दो मुख्यमंत्रियों के अलावा रमेश पोखरियाल निशंक और मेजर जनरल (रिटायर्ड) बीसी खंडूड़ी से पैसा वसूलना ही पड़ता. केस की सुनवाई के दौरान ही पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी का निधन हो गया था.

सभी प्रभावित बीजेपी नेता 

यह कोई इत्तेफ़ाक नहीं हो सकता है कि ये सभी बीजेपी नेता हैं और शायद इसीलिए कोर्ट से धक्का लगने के बाद सरकार ने इन्हें राहत देने के लिए अध्यादेश लाने का फ़ैसला किया. कैबिनेट ने फ़ैसला किया कि पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगलों, गाड़ी के किराए का भुगतान सरकार करेगी और उन्हें सभी सुविधाएं पहले की तरह मुफ्त दी जाती रहेंगी. कैबिनेट की संस्तुति पर राज्यपाल ने 5 सितम्बर, 2019 को मुहर लगा भी दी थी जिसके बाद हाईकोर्ट का फ़ैसला निष्प्रभावी हो गया था.

इस अध्यादेश को हाईकोर्ट में चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता के वकील कार्तिकेय हरि गुप्ता ने कहा कि इसी तरह का मामला यूपी सरकार में भी सामने आया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नए कानून को रद्द कर दिया था.
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First published: September 11, 2019, 6:57 PM IST
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