हल्द्वानी में बनेगा उत्तराखंड का पहला प्लाज्मा बैंक, Corona मरीजों के इलाज में होगी आसानी
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हल्द्वानी में बनेगा उत्तराखंड का पहला प्लाज्मा बैंक, Corona मरीजों के इलाज में होगी आसानी
उत्तराखंड में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा बैंक बनेगा.

Uttarakhand COVID-19 Update: कुमाऊं के सबसे बड़े हॉस्पिटल सुशीला तिवारी कोविड अस्पताल में उत्तराखंड का पहला प्लाज्मा बैंक (Plasma Bank) बनाने का नैनीताल के डीएम ने दिया आदेश. कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में मिलेगी सुविधा.

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हल्द्वानी. कोरोना मरीजों के लिए राहत की खबर है. हल्द्वानी में कोरोना वायरस (COVID-19) संक्रमित मरीजों के लिए अब प्लाज्मा बैंक (Plasma Bank) बनाने की तैयारी है. डीएम ने इसके आदेश सीएमओ को दे दिए हैं. इस बैंक में ऐसे कोरोना मरीजों के शरीर से निकाला हुआ प्लाज्मा स्टोर किया जाएगा, जो बीमारी से ठीक होकर घर लौट चुके हैं. नैनीताल (Nainital) के डीएम सविन बंसल ने बताया है कि जिन कोरोना पाॅजिटिव मरीजों का इलाज सुशीला तिवारी कोविड अस्पताल में हो रहा है, उनके ठीक होने के बाद डाटा बेस तैयार किया जा रहा है. यह डाटा मुख्य चिकित्साधिकारी और सुशीला तिवारी चिकित्सालय प्रबन्धन आपस में शेयर करेंगे. ये डाटा हर दिन अपडेट होगा.

डीएम के मुताबिक कोविड-19 हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने वाले मरीज से अस्पताल प्रबंधन प्लाज्मा डोनेशन का घोषणा पत्र भरवाएगा. उनसे स्वेच्छा से प्लाज्मा डोनेशन की लिखित सहमति ली जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर प्लाज्मा डोनेशन के लिए बुलाया जा सके. जिलाधिकारी ने बताया कि प्लाज्मा थेरेपी के लिए जिले में प्लाज्मा बैंक बनाया जाएगा. नैनीताल प्रदेश का पहला जिला होगा, जहां प्लाज्मा बैंक होगा. डीएम बंसल के मुताबिक जरूरत के अनुसार संक्रमित तथा कोरोना पाॅजिटिव लोगों का इलाज प्लाज्मा थेरेपी से होगा. उन्होंने बताया कि प्लाज्मा डोनर्स के ब्लड ग्रुप के साथ ही उसका मोबाइल नंबर, पता तथा अन्य सूचनाएं रिकार्ड मे रखी जाएंगी. ऐसे व्यक्ति को प्लाज्मा वारियर्स के रूप में पहचाने जाएंगे. प्रशासन उन्हें प्रशस्ति पत्र और गिफ्ट देकर सम्मानित भी करेगा. डीएम ने इस बैंक के लिए 2.5 लाख रुपए का फंड भी दे दिया है.

हल्द्वानी में बनेगा उत्तराखंड का पहला प्लाज्मा बैंक, Corona मरीजों के इलाज में होगी आसानी | Plasma Bank for COVID-19 infected patients in Sushila Tiwari Hospital
नैनीताल के डीएम ने प्लाज्मा बैक बनाने का दिया है आदेश.





क्या है प्लाज्मा थेरेपी
हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सीपी भैसोड़ा ने प्लाज्मा थेरेपी को आसान शब्दों में समझाया है. डॉ. भैसोड़ा कहते हैं कि प्लाज्मा वही दे सकता है जिसके शरीर में पहले कोरोना का संक्रमण हुआ है. संक्रमित मरीज के ठीक होने के बाद उसके शरीर में एंटीबॉडी यानी कोरोना से लड़ने वाले तत्व पैदा होते हैं, जो उसके खून में प्लाज्मा के रूप में घुले रहते हैं. कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज के लिए इन्हीं ठीक हो चुके लोगों के खून से प्लाज्मा लिया जाता है, जिससे पीड़ित भी स्वस्थ हो जाता है. हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज और एम्स ऋषिकेश इस थेरेपी के जरिए मरीजों का इलाज कर रहे हैं. लेकिन डोनर की दिक्कत होने के कारण मरीजों को समय से प्लाज्मा नहीं मिल रहा. इसलिए नैनीताल में प्लाज्मा बैंक बनाने का फैसला लिया गया है.
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