नैनीताल में जानलेवा नहीं हुआ बड़ा हादसा, राजभवन रोड रात में टूटी, मलबा दुकानों पर गिरा

नैनीताल की पहचान कही जाने वाली सड़क दरककर टूट गई.

भारी बारिश के चलते हाल में इस सड़क में दरारें उभर गई थीं. टेंपरेरी काम आज़ादी से पहले की इस सड़क को बचा नहीं सका और यह भरभराकर टूट गई. ये भी जानिए​ कि उत्तराखंड के कुमाऊं रीजन में कैसा रहने वाला है मौसम.

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    नैनीताल. शहर के प्रमुख रास्तों में शुमार राजभवन मार्ग के नीचे पालिका बाज़ार की करीब एक दर्जन दुकानें मलबे की चपेट में आ गईं. वास्तव में पिछले चार दिनों से हो रही ज़बरदस्त बारिश के कारण राजभवन रोड का 20 मीटर लंबा हिस्सा दरककर नीचे स्थित दुकानों पर गिर पड़ा. सड़क ही नहीं, बल्कि सुरक्षा दीवार भी टूट गई और इसका मलबा भी गिरा. यह हादसा बहुत बड़ा और जानलेवा हो सकता था, अगर दिन में होता. लेकिन देर रात होने से जान का नुकसान नहीं हुआ. इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया गया है.

    बताया जाता है कि राजभवन मार्ग पर कुछ दिन पहले ही बड़ी दरारें देखी गई थीं इसलिए दुकानों को बंद करवाया गया था. अस्थाई मरम्मत करवाई गई थी, लेकिन सड़क का यह बड़ा हिस्सा दरक ही गया, जिससे दुकानों को खासा नुकसान होने की बात कही जा रही है. मीडिया में आई एक खबर के मुताबिक अभी पुलिस यहां नुकसान का आंकलन कर रही है. कोतवाल अशोक कुमार सिंह ने जनहानि न होने की पुष्टि की है. अब विकल्प के तौर पर माल रोड को खोला जाएगा और ट्रैफिक वहीं से डायवर्ट होगा.

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    नैनीताल में वीकेंड पर अच्छी बारिश होने की संभावना है.


    भूगर्भ विज्ञान क्या कहता है?
    शहर के डीएसबी कॉलेज से तल्लीताल तक का जो रास्ता, राजभवन रोड पर है, उसे भूगर्भ विज्ञान के नज़रिये से काफी संवेदनशील बताया जाता है. पर्यावरणविद प्रो अजय रावत ने जागरण से बातचीत में कहा कि पहले इस रास्ते पर केवल पैदल लोगों को ही अनुमति थी. राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी नैनीताल के इस रास्ते पर साल में एकाध बार ही राज्यपाल के वाहन निकला करते थे. मगर आज़ादी के बाद से इस रास्ते को डामरीकृत करके वाहनों के लिए खोल दिया गया. सीवेज की सही व्यवस्था न होने से यहां भूस्खलन का खतरा बना रहता है.

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    क्या हैं नैनीताल में मौसम के हाल?
    16 जुलाई तक स्थिति यह थी कि नैनीताल में ज़रूरत से 21 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई थी, लेकिन 17 जुलाई से शहर ही नहीं, बल्कि पूरे कुमाऊं इलाके में ज़ोरदार बारिश हुई. अब करीब 10 फीसदी का ही अंतर रह गया है. इधर मौसमी विज्ञानी डॉ. आरके सिंह के हवाले से कहा गया है कि बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से 25 व 26 जुलाई को तेज़ बारिश फिर हो सकती है. हालांकि 23 व 24 जुलाई को हल्की बारिश की संभावना है.

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