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रामनगर के सरकारी अस्पताल को PPP मोड पर देने के प्रस्ताव का विरोध शुरू

रामनगर के संयुक्त चिकित्सालय को पीपीपी मोड में चलाने के प्रस्ताव का विरोध होने लगा है.

रामनगर के संयुक्त चिकित्सालय को पीपीपी मोड में चलाने के प्रस्ताव का विरोध होने लगा है.

लोग कह रहे हैं कि लोगों को सस्ता और अच्छा इलाज उपलब्ध करवाना सरकार की ज़िम्मेदारी है और सरकार इसे पूरा कर पाने में नाका ...अधिक पढ़ें

    कुमाऊं और गढ़वाल के प्रवेश द्वार पर स्थित रामनगर के संयुक्त चिकित्सालय को पीपीपी मोड में चलाने का प्रस्ताव है. अभी इस पर जमीनी स्‍तर पर काम भी शुरू नहीं हुआ है, लेकिन विरोध के स्वर सुनाई देने लगे हैं. अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अभी यह शुरुआती प्रस्ताव है और यह सिस्टम कैसे काम करेगा, इस पर चर्चा होना अभी बाकी है. लेकिन स्थानीय लोग इसे सस्ता इलाज छीने जाने के षड्यंत्र के रूप में देख रहे हैं.

    रामनगर संयुक्त चिकित्सालय के सीएमएस डॉक्टर टीके पंत के अनुसार विश्व बैंक से सहायता प्राप्‍त एक योजना के तहत अस्पताल को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत चलाने का प्रस्ताव है. यह प्रस्ताव बहुत शुरुआती स्तर पर है और अभी इस पार्टनरशिप की शर्तों पर बात होनी बाकी है.

    वहीं लोग इसे सरकार द्वारा अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ना बता रहे हैं. सामाजिक कार्यकर्ता मुनीष कुमार कहते हैं कि पहले प्रदेश के कुछ अस्पतालों को पीपीपी मोड पर दिया गया था और वह अनुभव अच्छा नहीं रहा था. सरकार के साथ पार्टनरशिप करने वाले अस्पताल मरीजों को अपने यहां रेफर करते रहे.

    सामाजिक कार्यकर्ता अजीत साहनी भी कुछ ऐसी ही बात कहते हैं. साहनी कहते हैं कि लोगों को सस्ता और अच्छा इलाज उपलब्ध करवाना सरकार की ज़िम्मेदारी है और सरकार इसे पूरा कर पाने में नाकाम साबित हो रही है. वह कहते हैं कि सरकार के साथ पार्टनरशिप करने वाले अस्पताल सरकारी अस्पताल का इस्तेमाल अपनी दुकान चमकाने के लिए करते हैं.

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