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नैनीताल की श्रीराम सेवक सभा आजादी से पहले से सिखा रही 'कुमाऊंनी' संस्कृति का पाठ, जानिए इतिहास

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कुमाऊं की संस्कृति को बचाने के लिए यहां कुमाऊंनी रामलीला का मंचन प्रतियोगिता के रूप में किया जाने लगा.

    रिपोर्ट- हिमांशु जोशी, नैनीताल

    नैनीताल के मल्लीताल में स्थित श्रीराम सेवक सभा (Shri Ram Sevak Sabha Nainital) अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रम करवाने के लिए जानी जाती है. वैसे तो इस संस्था को स्थापित करने की मुख्य वजह रामलीला का आयोजन करना था. हालांकि समय के साथ-साथ यहां अन्य धार्मिक और कुमाऊं की संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाने लगे.

    श्रीराम सेवक सभा साल 1918 में स्थापित हुई थी. स्वर्गीय दुर्गालाल साह, खजांची और तुलाराम साह ने इसके निर्माण में सहयोग दिया था. साल 1925 से कुमाऊं में नंदा देवी महोत्सव का आयोजन किया गया था. 1926 से नैनीताल राम सेवक सभा ने भी नंदा देवी महोत्सव का आयोजन शुरू किया, जो तब से लेकर अब तक हर साल मनाया जाता है.

    सालभर आयोजित किए जाते हैं कार्यक्रम

    कुमाऊं की संस्कृति को बचाने के लिए यहां कुमाऊंनी रामलीला का मंचन प्रतियोगिता के रूप में किया जाने लगा. इसके बाद यहां सामूहिक जनेऊ के कार्यक्रम भी होने लगे. साथ ही खड़ी होली-बैठकी होली का आयोजन किया जाता है. इसके अलावा सालभर यहां अलग-अलग त्योहारों पर कार्यक्रम किए जाते हैं.

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