कोर्ट के आदेश के बाद से वन गुर्जरों को सताने लगी विस्थापन की चिंता

कोर्ट ने इन्हें अतिक्रमणकारी मानते हुए यहां से इस गांव को खाली कराने के आदेश दिया है. इसके बाद से ग्रामीण बैचेन हैं. ग्रामीणों की सबसे बड़ी समस्या है कि वे अचानक अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कहां जाएं.

Govind Patni | News18 Uttarakhand
Updated: September 10, 2018, 4:43 PM IST
कोर्ट के आदेश के बाद से वन गुर्जरों को सताने लगी विस्थापन की चिंता
नैनीताल - कोर्ट के आदेश के बाद से ग्रामीणों की नींद उड़ी.
Govind Patni
Govind Patni | News18 Uttarakhand
Updated: September 10, 2018, 4:43 PM IST
कॉर्बेट नेशनल पार्क से वन गुर्जरों को हटाने के आदेश के बाद अब हाईकोर्ट ने सुंदरखाल के अतिक्रमण को भी हटाने का आदेश दे दिया है. कोर्ट के इस आदेश के बाद से ग्रामीणों की नींद उड़ गई है. ग्रामीणों को अब अपने आशियाने के उजड़ने का डर सता रहा है.

अल्मोडा, नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल जिलों के अऩुसूचित जाति के भूमिहीनों ने सत्तर के दशक में सत्याग्रह किया. इसके बाद इन भूमिहीनों को रामनगर के मालधनचौड में जमीन आबंटित की गई. लेकिन इसमें कई परिवार ऐसे थे जिन्हें वहां जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई. उन्हें 12 जून 1972 को सुंदरखाल में बसा दिया गया. लेकिन अब कोर्ट ने इन्हें अतिक्रमणकारी मानते हुए यहां से इस गांव को खाली कराने के आदेश दिया है. इसके बाद से ग्रामीण बैचेन हैं. ग्रामीणों की सबसे बड़ी समस्या है कि वे
अचानक अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कहां जाएं.

सुंदरखाल गांव रामनगर वन प्रभाग के कोसी रेंज की धुलवा बीट का हिस्सा रहा है. लेकिन अब अधिकारी इसे कॉर्बेट नेशनल पार्क का क्षेत्र बता रहे हैं. कॉर्बेट प्रशासन अब इस क्षेत्र का सर्वे करा रहा है. सर्वे के दौरान जो भी अतिक्रमण पाया जायेगा उसे वन अधिनियमों के तहत वहां से हटा दिया जायेगा. दशकों से इस गांव में रह रहे इन ग्रामीणों को आज तक मूलभूत सुविधायें तो सरकार नहीं दे पाई. लेकिन कोर्ट के एक आदेश के बाद अनुसूचित जाति के इन परिवारों को फिर भूमिहीन किये जाने की तैयारी चल रही है. सरकार को इन्हें कहीं जमीन देकर बसाने की व्यवस्था करने की जरूरत है ताकि आगे इनके साथ ऐसी कोई नौबत ना आए.
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