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ऐसे लड़ेंगे कोरोना वायरस से… अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी, जो तैनात हैं वह भी गायब
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Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: January 30, 2020, 12:48 PM IST
ऐसे लड़ेंगे कोरोना वायरस से… अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी, जो तैनात हैं वह भी गायब
कुमाऊं मंडल में डॉक्टरों की भारी कमी के बीच यह सवाल उठ रहे हैं कि अगर कोरोना वायपस का कोई मरीज़ आ गया तो क्या होगा.

मंडल मुख्यालय नैनीताल में ही 133, ऊधम सिंह नगर जैसे तराई वाले जिले में 137 डॉक्टरों के पद रिक्त हैं.

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नैनीताल. चीन से उपजी कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी को लेकर उत्तराखंड में भी सतर्कता बरती जा रही है. हाल ही में मुख्य सचिव ने केंद्र सरकार को यह बताया भी था कि उत्तराखंड में कोरोना वायरस से निपटने के लिए क्या तैयारियां की गई हैं. मुख्य सचिव की बात सुनकर तो ऐसा लग रहा था कि राज्य पूरी तरह से इस बीमारी और किसी भी बीमारी से निपटने में सक्षम है लेकिन हकीकत यह नहीं है. कुमाऊं मंडल में डॉक्टरों की भारी कमी के बीच यह सवाल उठ रहे हैं कि अगर कोई मरीज़ आ गया तो क्या होगा. यहां अस्पतालों में न सिर्फ डाक्टरों की कमी है बल्कि जो थे भी उनमें से भी कई गायब हैं.

डॉक्टरों की कमी 

कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में अलग वॉर्ड तो बना दिए लेकिन सवाल यह है कि बिना डॉक्टरों के इनमें होगा क्या? कुमाऊं मण्डल की बात करें तो यहां डॉक्टरों की भारी कमी है. मंडल मुख्यालय नैनीताल में ही 133, ऊधम सिंह नगर जैसे तराई वाले जिले में 137 डॉक्टरों के पद रिक्त हैं.

नेपाल-चीन से लगे पिथौरागढ जिले में 100, चम्पावत में 60 और अल्मोड़ा में 124 तो बागेश्वर में 58 डॉक्टरों के पद रिक्त हैं. मण्डल के कई अस्पतालों की हालत ये हैं कि यहां लोगों की जान बचाने वाले केन्द्रों में चिकित्साधिकारी ही नहीं है. डाक्टरों की कमी पर कुमाऊं मंडल के एडी हेल्थ एसके शाह लाचारी जताते हैं.

यहां गयाब हैं इतने डॉक्टर 

अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी तो है ही डॉक्टर गायब भी हैं. अल्मोड़ा ज़िले में 20 डाक्टरों का अता-पता नहीं है तो नैनीताल जैसे वीवीआईपी ज़िले से भी 15 डॉक्टर गायब हैं. चम्पावत के 2 और बागेश्वर के 5 डॉक्टर कहां हैं, इसकी ख़बर विभाग को भी नहीं है. हालांकि डाक्टरों की कमी दूरी करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने उनके साथ बॉंड साइन किए हैं लेकिन इनमें से भी कई बॉंडधारी डाक्टर या तो ड्यूटी पर गए ही नहीं या फिर सालों से गायब हैं.

अब मेडिकल एमरजेंसी जैसी हालत आने पर विभाग को फिर इन फरार डॉक्टरों की याद आई है. शाह कहते हैं कि बॉंड का पालन न करने वाले सभी डॉक्टरों से रिकवरी की जाएगी.सरकार के बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बाद भी पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत नहीं सुधर सकी है. ऐसे में कोरोना वायरस ही नहीं मामूली इलाज भी लोगों को देना सुनिश्चित करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है.

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First published: January 30, 2020, 12:43 PM IST
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