छह महीने में न दिखाई दे कोई आवारा कुत्ता, डॉग शेल्टर बनाएं, घर-घर करें सर्वेः HC
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छह महीने में न दिखाई दे कोई आवारा कुत्ता, डॉग शेल्टर बनाएं, घर-घर करें सर्वेः HC
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अदालत ने कहा कि इन आदेशों का पालन कराने की ज़िम्मेदारी मुख्य सचिव की होगी. मुख्य सचिव के आदेश का पालन न करने वाले अधिकारी न्यायलय की अवमानना के उत्तरदायी होंगे.

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उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने प्रदेश में बढ़ रहे आवारा कुत्तों के आतंक से निजात पाने के लिए सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने सरकार को हर शहर में डॉग शेल्टर बनाने का आदेश सुनाया और यह भी कहा कि किसी को इस पर आपत्ति है तो वह इन कुत्तों को अपने घर ले जाए.

अधिवक्ता जीसी खोलिया एक जनहित याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि आवारा कुत्तों के काटने से अभी कुछ सालों में ही नैनीताल जिले के 11 हज़ार लोगों को काटा है और राजस्थान की एक पर्यटक बच्ची की कुत्ते के हमले से मौत हो गई थी.

न्यायमूर्ति वीके बिष्ट और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खण्डपीठ ने इस जनहित सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी शहरों में डॉग शेल्टर हाउस बनाएं. इन डॉग शेल्टर हाउस में कुत्ते रखने में यदि किसी संस्था को आपत्ति है तो वह संस्था इन कुत्तों को अपने पास ले जा सकती है.



खण्डपीठ ने राज्य सरकार से आवारा ख़तरनाक किस्म के कुत्तों को मारने के लिए नीति बनाने के निर्देश देते हुए कहा है कि 6 महीने बाद कोई भी कुत्ता, सड़कों और गलियो में आवारा घूमता न दिखे. अदालत ने मुख्य सचिव से कहा है कि वे राज्य के सभी नगर निकायों को निर्देश दिए कि वे घर-घर जाकर कुत्तों का सर्वे करें कि कुत्तों का लाइसेंस बना है या नहीं. अगर नहीं तो उनको अपने साथ ले जाएं. इस आशय का विज्ञापन समाचार पत्रो में प्रकाशित कर आम जनता तक पहुचाएं.
अदालत ने कहा कि इन आदेशों का पालन कराने की ज़िम्मेदारी मुख्य सचिव की होगी. मुख्य सचिव के आदेश का पालन न करने  वाले अधिकारी न्यायलय की अवमानना के उत्तरदायी होंगे. मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी. इसमें मुख्य सचिव से इस सम्बन्ध में की गई कार्रवाई को लेकर जवाब पेश करना होगा.

(वीरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट)
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