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चारधाम एक्ट पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई, सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर केंद्र, राज्य सरकार और बोर्ड को नोटिस
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Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: February 25, 2020, 4:03 PM IST
चारधाम एक्ट पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई, सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर केंद्र, राज्य सरकार और बोर्ड को नोटिस
सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट के सामने कहा कि कल रात ही बोर्ड का सीईओ नियुक्त किया गया है लिहाज़ा जब तक इस पूरे मामले की सुनवाई जारी है तब तक किसी तरह की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए.

उत्तराखंड सरकार की ओर से लाए गए चारधाम देवस्थानम एक्ट को नैनीताल हाईकोर्ट में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दी चुनौती. कोर्ट ने सभी पक्षकारों से जवाब तलब किया.

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नैनीताल. चारधाम देवस्थानम एक्ट से सरकार की मुश्किलें बढ़नी तय हैं. आज हाईकोर्ट ने पूरे मामले पर सुनवाई कर केन्द्र, राज्य सरकार और चारधाम देव स्थानम बोर्ड के सीईओ को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने कहा है कि तीन हफ़्ते के भीतर सभी पक्षकार अपना जवाब दाखिल करें. सुनवाई के दौरान आज याचिकाकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट के सामने कहा कि कल रात ही इसका सीईओ नियुक्त किया गया है. लिहाजा जब तक इस पूरे मामले की सुनवाई जारी है, तब तक किसी तरह की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए. कोर्ट ने सरकार से इस मामले पर भी जवाब दाखिल करने को कहा है.

 

विरोध से बेपरवाह थी सरकार
बता दें कि राज्य सरकार ने चारधाम देवस्थानम एक्ट पास कर बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री समेत 51 मंदिरों को इसमें शामिल किया है. तीर्थ-पुरोहितों और हक-हकूकधारियों ने इसका भारी विरोध किया है. उन्होंने चारधाम यात्रा के दौरान धार्मिक कर्मकांड नहीं करने तक का ऐलान कर दिया, लेकिन सरकार पर इसका कोई असर होता नहीं दिखा.



सड़क से सदन तक विरोध का जब सरकार पर असर नहीं हुआ, तो तीर्थ पुरोहित और हक-हकूधारी महापंचायत बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी से मिली और उनसे इस मामले में दखल देने का आह्वान किया. स्वामी ने उन्हें इस मामले में समर्थन देने का भरोसा दिया. साथ ही जनहित याचिका दायर करने का आश्वासन भी दिया था.

असंवैधानिक कानून
सोमवार को सुब्रमण्यम स्वामी ने देवस्थानम एक्ट को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की थी, जिस पर आज सुनवाई हुई. स्वामी ने हाईकोर्ट में कहा कि राज्य सरकार का एक्ट असंवैधानिक है और सुप्रीम कोर्ट के 2014 के आदेश का उल्लंघन करता है. याचिका में कहा गया है कि सरकार को मंदिर चलाने का कोई अधिकार नहीं है. मंदिर को भक्त या फिर उनके लोग ही चला सकते हैं, लिहाजा सरकार के एक्ट को निरस्त किया जाए.

सरकार की दलील को स्वामी ने हंसी में उड़ाया
आज सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि स्वामी ने राजनीति से प्रेरित होकर प्रचार के लिए यह जनहित याचिका दाखिल की है. सुब्रमण्यम स्वामी ने इस बात को हंसी में उड़ा दिया और कहा कि जब भी वह याचिका दायर करते हैं, ऐसी बातें कही जाती हैं. लेकिन याचिका के गुण-दोष पर फैसला कोर्ट करता है, सरकार नहीं.

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First published: February 25, 2020, 2:33 PM IST
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