उत्तराखंड में गुलदार की ऐसी दहशत कि वन विभाग ने जारी की बचने के लिए एसओपी

वन विभाग मीडिया में गुलदार से बचने के लिए बड़ी-बड़ी एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी कर रहा है ताकि लोग सुरक्षित रह सकें.
वन विभाग मीडिया में गुलदार से बचने के लिए बड़ी-बड़ी एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी कर रहा है ताकि लोग सुरक्षित रह सकें.

तराई-भाबर के मैदान से लेकर उच्च हिमालयी इलाकों तक में खूंखार गुलदार के आतंक से लोग दहशत में हैं

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हल्द्वानी. उत्तराखंड का कोई जिला ऐसा नहीं बचा है जहां गुलदार (Leopard) का आतंक देखने को नहीं मिल रहा. पिछले 15 दिन में गुलदार हल्द्वानी, पिथौरागढ़, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा हर जगह इंसानी जिंदगी को निशाना बनाने की कोशिश कर चुका है. गुलदार का आतंक इतना बढ़ गया है कि वन विभाग को इस खूंखार जानवर से बचने के लिए लोगों को उपाय बताने पड़ रहे हैं. विभाग मीडिया में गुलदार से बचने के लिए बड़ी-बड़ी एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी कर रहा है ताकि लोग सुरक्षित रह सकें. आप भी जानिए कि गुलदार के हमले से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना होगा...

ध्यान रखें

  • केवल सावधानी से ही बचा जा सकता है.

  • अपने घर के चारों ओर कम से कम 50 से 100 मीटर तक लैंटाना, काला बांस, हिस्सर, गाजर घास न उगने दें. इन झाड़ियों में अक्सर गुलदार छुप जाता है और मौका मिलने पर हमला कर सकता है.

  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल जाते समय बच्चों को किसी वयस्क व्यक्ति के साथ स्कूल भेजें और यदि संभव हो तो बच्चों को समूह में स्कूल भेजना चाहिए.



  • आवागमन के लिए ऐसे रास्तों का प्रयोग करें जहां पर झाड़ियां अपेक्षाकृत कम हैं. संभव हो तो रास्ते के दोनों तरफ झाड़ियों को काटकर साफ कर दें.

  • महिलाएं जब जंगलों में जाएं तो कोशिश करें कि शाम 4 बजे से पहले घर लौट आएं. 4 बजे से अंधेरा होने तक गुलदार के हमले की घटनाएं ज्यादा होती हैं.

  • शाम 6 बजे से रात 8 बजे तक बच्चों को घर से बाहर न जाने दें. उन्हें होमवर्क पर लगाने या किसी अन्य काम में घर के भीतर ही व्यस्त रखें क्योंकि ऐसे समय में गुलदार शिकार की तलाश में अक्सर घरों के आसपास घूमते हैं.

  • बच्चों को घर के बाहर शौचालय में रात के समय अकेले न जाने दें.

  • गुलदार का व्यवहार पीछे से आक्रमण करने का है. इसलिए घर के बाहर मुकुटों का प्रयोग करें जो पीछे की तरफ मुख करके हों.

  • कोई भी महिला गाय और भैंस का दूध निकालने हेतु बच्चों को लेकर के न जाए.

  • खेतों में जाते समय महिलाएं कोशिश करें कि वह समूह में जाएं और काम करते समय बारी-बारी से पांच 5 मिनट में खड़े होकर इधर-उधर ज़रूर देखें. आमतौर पर देखा गया है कि सामने निगाह होने गुलदार हमला नहीं करता.

  • गुलदार द्वारा रात में हमला किए जाने की पूरी संभावना बनी रहती है. विशेषकर शाम 6 बजे से 8 बजे के बीच गुलदार ज़्यादा हमला करता है. इस दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. टॉर्च या किसी अन्य रोशनी में ही घर से बाहर निकलें. अंधेरा होने के बाद घर के बाहर काम हो तो आग जलाकर रखें.

  • जंगली जानवरों का शिकार न करें. गुलदार और बाघ को अगर जंगल में शिकार नहीं मिलता तो वह भोजन की तलाश में आबादी के इलाके में आ जाते हैं.

  • जंगलों को आग से बचाएं क्योंकि आग लगने की स्थिति में गुलदार और बाघ का भोजन बनने वाले छोटे-छोटे जानवर इसका शिकार होते हैं और अपने भोजन की तलाश में गुलदार और बाघ आबादी की तरफ आ जाते हैं.

  • आबादी के इलाके में गुलदार देखने पर तुरंत वन विभाग को सूचित करें.

  • घर में पाले गए पालतू पशुओं के मरने पर उनके शरीर को खुले में न फेंकें क्योंकि ऐसे मांस की तलाश में गुलदार आपके घर के करीब आ सकता है.



पिछले दो महीने में कुमाऊं में गुलदार के हमलों में मौत

  • 19 सितंबर- अल्मोड़ा के भिकियासैंण में सात साल की बच्ची को बनाया निवाला

  • 21 सितंबर- अल्मोड़ा के भिकियासैंण में एक बच्ची पर हमला

  • 22 सितंबर- पिथौरागढ़ के सुकौली में एक युवक को बनाया निवाला

  • 24 सितंबर- छाना पांडेय गांव में किशोरी को बनाया शिकार

  • 26 सितंबर- पिथौरागढ़ के धारापानी गांव में ग्रामीण पर हमला

  • 5 अक्टूबर - हल्द्वानी के फतेहपुर में दिन में किशोरी और शाम को बाजार इलाके में नौ महीने के मासूम बच्चे पर हमला.

  • 7 अक्टूबर- पिथौरागढ़-बेरीनाग के भटीगांव में सात साल की बच्ची को बनाया निवाला

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