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नैनीताल की ठंडी सड़क में मिलता है सुकून, जानिए अंग्रेजों ने क्यों बनाई थी ये रोड?

नैनीताल की ठंडी सड़क अपने शांत माहौल और वातावरण की वजह से पर्यटकों को आकर्षित करती है. वहीं, इतिहासकार और पर्यावरणविद डॉ अजय रावत ने बताया कि साल 1890 तक नैनीताल का नगरीकरण हो गया था और यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में भी जाना जाने लगा था. 

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रिपोर्ट- हिमांशु जोशी

नैनीताल. उत्तराखंड के खूबसूरत पर्यटन स्थलों की बात की जाए, तो हर एक जगह का शानदार इतिहास रहा है. सरोवर नगरी नैनीताल (Nainital Tourist Spots) भी इस फेहरिस्त में शामिल है. यहां पर्यटक खूबसूरत झील देखने और शांत वादियों में सुकून की तलाश में आते हैं. नैनीताल में सुकून की एक और जगह मानी जाती है और वो है यहां की ठंडी सड़क (Thandi Sadak) है.

नैनीताल की ठंडी सड़क अपने शांत माहौल और वातावरण की वजह से पर्यटकों को आकर्षित करती है. झील के किनारे तल्लीताल से मल्लीताल को जोड़ती यह सड़क हरे-भरे पेड़ों से घिरी है. इसे अंग्रेजों ने बनाया था. इस सड़क के निर्माण का इतिहास नैनीताल के नगरीकरण से ही जुड़ा है.

इतिहासकार और पर्यावरणविद रावत ने कही ये बात
इतिहासकार और पर्यावरणविद डॉ अजय रावत ने बताया कि साल 1890 तक नैनीताल का नगरीकरण हो गया था और यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में भी जाना जाने लगा था. उस समय तक नैनीताल की माल रोड की स्थापना हो गई थी, तब अंग्रेजों ने यह सोचा कि नैनीताल में एक ऐसी जगह बनानी चाहिए, जहां भीड़ थोड़ी कम हो. सुबह लोग उस क्षेत्र में जाएं, मॉर्निंग वॉक और एक्सरसाइज करें. इस वजह से ठंडी सड़क का निर्माण किया गया.

डॉ रावत ने आगे बताया कि ठंडी सड़क का निर्माण करने के पीछे की मुख्य वजह थी, वहां की प्रकृति को बचाए रखना और मुख्य रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुबह टहलने के लिए शांत माहौल का होना. इसका निर्माण हुआ और यह अंग्रेजों के बनाए अभी मानकों के अनुकूल साबित हुई.

संवेदनशील है ठंडी सड़क का इलाका
बताते चलें कि ठंडी सड़क का इलाका काफी संवेदनशील है. यहां साल 1945 में पहली बार भूस्खलन देखने को मिला था. 24 जुलाई, 1998 को इस क्षेत्र में दूसरा भूस्खलन देखने को मिला था. ठंडी सड़क के जलागम क्षेत्र में अवैध निर्माण इस भूस्खलन की मुख्य वजह था. पिछले साल (2021) आई आपदा में ठंडी सड़क में एक बार फिर भूस्खलन हुआ था, जिससे सारा मलबा झील में जा गिरा और उस सड़क को आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया. भूस्खलन को रोकने के लिए उस जगह पर शार्ट टर्म ट्रीटमेंट किया गया. हालांकि बीते 29 जून को आई बारिश की वजह से वहां फिर से भूस्खलन हुआ और सारा ट्रीटमेंट भी ध्वस्त हो गया. फिलहाल इस क्षेत्र को आवाजाही के लिए एक बार फिर बंद कर दिया गया है.

डॉ अजय रावत ने बताया कि इस क्षेत्र का माहौल और पवित्रता को बरकरार रखने के लिए झील विकास प्राधिकरण और प्रशासन की तरफ से यहां गाड़ियों का आना प्रतिबंधित है, क्योंकि यह इलाका काफी संवेदनशील है. इसको देखते हुए हाईकोर्ट की तरफ से भी यह नियम लागू किया गया कि यह केवल पैदल मार्ग ही रहेगा. हालांकि कई बार यह देखा गया है कि रात में अवैध ढंग से वहां गाड़ियां पार्क की जा रही हैं. इसके अलावा यहां अवैध रूप से बांज के पेड़ों के कटने से भी भूस्खलन की समस्याएं आ रही हैं. उन्होंने कहा कि अगर इस तरह के अवैध काम नहीं रुकते हैं, तो भविष्य में भारी नुकसान भी झेलना पड़ सकता है.

Tags: Nainital news, Nainital tourist places

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