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पूर्व मुख्यमंत्री को मुफ़्त सुविधाओं के लिए इसी विधानसभा सत्र में आएगा विधेयक, कानून बनने से पहले ही चुनौती की तैयारी

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: November 18, 2019, 6:20 PM IST
पूर्व मुख्यमंत्री को मुफ़्त सुविधाओं के लिए इसी विधानसभा सत्र में आएगा विधेयक, कानून बनने से पहले ही चुनौती की तैयारी
पूर्व मंत्रियों को मुफ़्त बंगले, गाड़ी दिए जाने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका नैनीताल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 3 मई, 2019 को आदेश दिया था कि पूर्व मुख्यमंत्री बाजार भाव से बंगले, गाड़ी आदि सभी सुविधाओं का किराया वहन करेंगे. (फ़ाइल फ़ोटो)

सरकार (Uttarakhand Government) ने कोर्ट (Uttarakhand High Court) में दाखिल अपने जवाब में कहा है कि वह जो अध्यादेश लाई है वह कानून सम्मत है और हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं है.

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नैनीताल. पूर्व मुख्यमंत्रियों के बकाया मामले पर सरकार के अध्यादेश को मिली चुनौती पर दो पूर्व मुख्यमंत्रियों विजय बहुगुणा और बीसी खंडूड़ी ने ने हाईकोर्ट से समय मांगा है जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 25 नवम्बर तक जवाब दाखिल करने के लिए समय दे दिया है. आज सरकार ने कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा है कि वह जो अध्यादेश लाई है वह कानून सम्मत है और हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं है. सुनवाई के दौरान कोर्ट को यह भी बताया गया कि 5 नवम्बर से शुरु हो रहे विधानसभा सत्र में अध्यादेश को कानून बनाने की प्रक्रिया शुरु होगी जिसका याचिकाकर्ता के वकील ने विरोध किया.

यह है मामला

बता दें कि पूर्व मंत्रियों को मुफ़्त बंगले, गाड़ी दिए जाने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका नैनीताल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 3 मई, 2019 को आदेश दिया था कि पूर्व मुख्यमंत्री बाजार भाव से बंगले, गाड़ी आदि सभी सुविधाओं का किराया वहन करेंगे. हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि 6 महीने के दौरान सभी पैसा जमा करें और अगर ऐसा नहीं करते हैं तो सरकार इनके खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरु करें.

इसके बाद सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को राहत देने के लिए अध्यादेश लाने का फ़ैसला किया. कैबिनेट ने फ़ैसला किया कि पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगलों, गाड़ी के किराए का भुगतान सरकार करेगी और उन्हें सभी सुविधाएं पहले की तरह मुफ्त दी जाती रहेंगी. कैबिनेट की संस्तुति पर राज्यपाल ने 5 सितम्बर, 2019 को मुहर लगा भी दी थी जिसके बाद हाईकोर्ट का फ़ैसला निष्प्रभावी हो गया था.

चुनौती और फिर चुनौती के लिए तैयार

पूर्व मुख्यमंत्रियों को मुफ़्त सुविधाएं बांटे जाने को चुनौती देने वाली संस्था रूलक (रूरल लिटिगेशन एंड एंटाइटलमेंट केंद्र) ने इस अध्यादेश की वैधता को हाईकोर्ट में चुनौती दी. इसी पर सुनवाई के दौरान आज सरकार ने अदालत को बताया कि 5 तारीख से शुरु होने वाले सत्र में इस संबंध में विधेयक सदन में पेश किया जाएगा और सदन इस पर फ़ैसला ले सकता है.

याचिकाकर्ता के वकील कार्तिकेय हरि गुप्ता ने इसका विरोध किया. उन्होंने अदालत को बताया कि अगर विधानसभा पूर्व मुख्यमंत्रियों को लाभ पहुंचाने के लिए कोई कानून बनाती है तो उसे भी अदालत में चुनौती दी जाएगी.
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First published: November 18, 2019, 5:13 PM IST
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