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कुमाऊं विश्वविद्यालय में पढ़ाया जाएगा तीन तलाक़ क़ानून... कुलपति ने बताई यह वजह

कुमाऊं विश्वविद्यालय में पढ़ाया जाएगा तीन तलाक़ क़ानून... कुलपति ने बताई यह वजह

कुमाऊं विश्वविद्यालय देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय बनने जा रहा है जहां तीन तलाक़ क़ानून को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा.

कुमाऊं विश्वविद्यालय देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय बनने जा रहा है जहां तीन तलाक़ क़ानून को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा.

विश्वविद्यालय के कुलपति केएस राणा ने बताया कि विश्वविद्यालय के लॉ पाठ्यक्रम में मुस्लिम पर्सनल लॉ शामिल है जो सालों से विधि के छात्रों को पढ़ाया जाता है.

नैनीताल. कुमाऊं विश्वविद्यालय (Kumaon University) देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय (First University of India) बनने जा रहा है जहां तीन तलाक़ क़ानून (Triple Talaq Law) को पाठ्यक्रम (Syllabus) में शामिल किया जाएगा. कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति केएस राणा (Vice Chancellor KS Rana) ने कहा कि इसी सत्र से तीन तलाक़ क़ानून को पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सकता है. कुलपति ने न्यूज़ 18 से बातचीत में कहा कि संसद से पास होने के बाद तीन तलाक़ विधेयक क़ानून बन चुका है तो क़ानून के विद्यार्थियों (Students of Law) को इसे पढ़ाया भी जाना चाहिए. दरअसल कुमाऊं विश्वविद्यालय में पहले से ही मुस्लिम पर्सनल लॉ (Muslim Personal Law) पढ़ाया जा सका है अब तीन तलाक़ को भी इसमें शामिल कर लिया जाएगा.

नए क़ानून के तहत दर्ज हो रहे हैं मामले 

बता दें कि उत्तराखंड की आबादी में लगभग 14 फ़ीसदी मुस्लिम हैं. तीन तलाक़ मामले को इसके अंजाम तक ले जाने वाली तीन महिलाओं में से एक उत्तराखंड की ही हैं. काशीपुर की सायरा बानो ने अपने पति के तीन तलाक़ को लेकर मनमाने बर्ताव को चुनौती दी थी और तीन तलाक़ कानून बनने में उनके संघर्ष की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

दरअसल तीन तलाक़ का क़ानून बनने के बाद भी ऐसे मामले थमे नहीं हैं. इस क़ानून को लागू हुए 24 घंटे भी नहीं हुए थे कि उत्तराखंड में भी तीन तलाक़ के मामले सामने आने लगे थे जो अब भी जारी हैं. क़ानून बनने के बाद महिलाएं तीन तलाक़ को चुनौती दे रही हैं और पुलिस भी इन मामलों को नए कानूनी प्रावधानों के तहत ही दर्ज कर रही है.

तैयारी ज़रूरी 

नए घटनाक्रम में अदालतों में तीन तलाक़ के मामलों का ज़्यादा आना तय है. ज़ाहिराना तौर पर इसके लिए वकीलों को भी तैयारी करनी होगी. कुमाऊं विश्वविद्यालय ने इसी दिशा में कदम उठाया है. विश्वविद्यालय के कुलपति केएस राणा ने बताया कि विश्वविद्यालय के लॉ पाठ्यक्रम में मुस्लिम पर्सनल लॉ शामिल है जो सालों से विधि के छात्रों को पढ़ाया जाता है. केन्द्र और राज्य सरकारों के कानूनों में संशोधन के बाद इन कोर्सों को अपग्रेड करना तय हो जाता है.

तीन तलाक़ कानून को पाठ्यक्रम में शामिल करने के बाद इसी सत्र में बोर्ड ऑफ़ स्टडीज की बैठक बुलाई जाएगी और उसके अननुमोदन के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा. अभी मुस्लिम लॉ दूसरे सेमेस्टर में पढ़ाया जाता है. तीन तलाक़ क़ानून में इसमें विशेष टॉपिक के तौर पर शामिल किया जाएगा.

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Tags: Kumaon University, Triple talaq, Uttarakhand news

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