उत्तराखंड के मुख्य सचिव को हाईकोर्ट का अवमानना नोटिस... सरकारी ज़मीन पर बने अवैध धार्मिक स्थल न हटाने पर मांगा जवाब

देहरादून समेत राज्य भर में  धार्मिक स्थल सार्वजनिक भूमि पर अचानक बनते हैं और फिर बड़े होते जाते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
देहरादून समेत राज्य भर में धार्मिक स्थल सार्वजनिक भूमि पर अचानक बनते हैं और फिर बड़े होते जाते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अवमानना याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन राज्य सरकार ने नहीं किया गया.

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नैनीताल. सरकारी ज़मीन पर बने अवैध धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई न करने पर हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव ओम प्रकाश को अवमानना का नोटिस जारी किया है और जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने पूछा है कि सार्वजनिक स्थलों पर मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा व चर्चों को अभी तक क्यों नहीं हटाया गया है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 29 नवंबर को 2009 को सभी राज्यों को निर्देश दिए थे कि वह सार्वजनिक स्थलों पर अवैध रूप से बने सभी धार्मिक स्थलों को हटा दे लेकिन उत्तराखंड में अब भी सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक स्थल मौजूद हैं.

सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2009 के हैं निर्देश

अधिवक्ता विवेक शुक्ला ने हाईकोर्ट में इस मामले में अवमानना याचिका दाखिल की है. इस याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर 2009 को सभी राज्यों को निर्देश जारी कर सार्वजनिक स्थलों से मंदिर, मस्जिद गुरुद्वारा व चर्च यानी अवैध रूप से बने सभी धार्मिक स्थलों को हटाने का आदेश जारी किया था. याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी राज्य सरकार ने इस आदेश का अनुपालन नहीं किया गया.



याचिका में यह भी कहा गया है कि हाईकोर्ट ने भी इस मामले का संज्ञान लेकर सभी डीएम को 23 मार्च 2020 तक सार्वजनिक स्थानों से अवैध धार्मिक स्थल हटाने के आदेश भी जारी किए थे. लेकिन उत्तराखंड में इस आदेश का भी पालन नहीं किया गया. याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि ऐसे धार्मिक स्थलों के लिए सरकार ने कोई नीति भी नहीं बनाई है.

याचिकाकर्ता की दलील को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी कर दिए और जवाब दाखिल करने का आदेश दिया.
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