उत्तराखंड सरकार के पास नहीं है 108 एंबुलेंस में डीजल डालने का पैसा

हल्द्वानी में कोतवाली के बाहर एंबुलेंस खड़ी है, लेकिन मरीज को उनके परिजन ऑटो से ही अस्पताल ला रहे हैं और ले भी जा रहे हैं. इन 108 एंबुलेंसों को किसी इमरजेंसी कॉल का इंतजार नहीं है. अगर इनके पास कोई आपातकालीन कॉल आ भी जाती है तो भी ये चलने की स्थिति में नहीं है.

Shailendra | News18 Uttarakhand
Updated: September 7, 2018, 1:28 PM IST
उत्तराखंड सरकार के पास नहीं है 108 एंबुलेंस में डीजल डालने का पैसा
108 एंबुलेंस
Shailendra | News18 Uttarakhand
Updated: September 7, 2018, 1:28 PM IST
उत्तराखंड की त्रिवेंद्र रावत सरकार के पास 108 एंबुलेंस में डीजल डालने का बजट नहीं है. इसके चलते कुमाऊं के दो सबसे बड़े जिलों नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में 108 एंबुलेंस सेवा ठप पड़ चुकी है. लोग आपात स्थिति में 108 एंबुलेंस को फोन घुमा रहे हैं, लेकिन एंबुलेंस गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रही है. हालांकि सरकार अब 108 कर्मचारियों को एस्मा का डर दिखा कर डैमेज कंट्रोल में जुटी है.

हल्द्वानी में कोतवाली के बाहर एंबुलेंस खड़ी है, लेकिन मरीज को उनके परिजन ऑटो से ही अस्पताल ला रहे हैं और ले भी जा रहे हैं. इन 108 एंबुलेंसों को किसी इमरजेंसी कॉल का इंतजार नहीं है. अगर इनके पास कोई आपातकालीन कॉल आ भी जाती है तो भी ये चलने की स्थिति में नहीं है. राज्य की त्रिवेंद्र सरकार के पास इन एबुलेंस को चलाने के लिए डीजल डलवाने का बजट नहीं है, लिहाजा ये एंबुलेंस खाली टैंक के साथ खड़ी है. सरकार द्वारा इन एंबुलेंस चालकों को भी दो माह से तनख्वाह नहीं दी गई है.

प्रदेश में 108 एंबुलेंस वाहनों को नहीं चलने से दुर्घटना में घायल और गर्भवती महिलाओं की जांस सांसत में हैं. नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिले से रोजना 108 एंबुलेंस को तकरीबन 100 से 150 कॉल मिलती है, लेकिन एंबुलेंस ने चलने से एक भी मरीज को मदद नहीं मिल पा रही है.
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