कोरोना वायरस से निपटने की तैयारियों पर हाईकोर्ट ने मांगा केंद्र और राज्य सरकार से स्पष्टीकरण
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कोरोना वायरस से निपटने की तैयारियों पर हाईकोर्ट ने मांगा केंद्र और राज्य सरकार से स्पष्टीकरण
पहली बार उत्तराखंड हाईकोर्ट में वीडियो कॉन्फेंस से सुनवाई हुई है.

हाईकोर्ट के वकील दुष्यंत मैनाली के लिखे पत्र को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने यह स्पष्टीकरण मांगा है.

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नैनीताल. कोरोना वायरस से होने वाली महामरी से निपटने को लेकर तैयारियों पर हाईकोर्ट ने आज केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. हाईकोर्ट ने दोनों सरकारों को नोटिस जारी कर 18 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने यह स्पष्टीकरण हाईकोर्ट के वकील दुष्यंत मैनाली के लिखे पत्र को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए मांगा है. ख़ास बात यह है कि पहली बार उत्तराखंड हाईकोर्ट में वीडियो कॉन्फेंस से सुनवाई हुई है.

हाईकोर्ट को पत्र 

कई जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट में पक्ष रख रहे अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने हाईकोर्ट को पत्र लिखा है. इसमें कहा गया है कि राज्य में मेडिकल स्टाफ के लिए पीपीई किट और एन95 मास्क की कमी है. WHO की गाइडलाइन के अनुसार सर्वप्रथम सुरक्षा मेडिकल स्टाफ के होनी चाहिए.



पत्र में यह भी मांग की गई है कि सरकारर को प्राइवेट अस्पतालों में थर्मल स्कैनर और अन्य ज़रूरी उपकरणों को तत्काल कब्ज़े में ले लेना चाहिए ताकि दिक्कतों को कम किया जा सके. याचिका में डॉक्टरों के खाने व रहने के इंतज़ाम तत्काल करने की मांग की गई है.



ये मांगे जवाब 

मैनाली के पत्र को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि कितने पीपीई किट हैं और कितनों की और ज़रूरत है? यह भी बताने को कहा गया है कि साथ ही कितने मास्क की ज़रूरत है. कोर्ट ने राज्य सरकार ये यह भी पूछा है कि कोरोना के बीच अन्य बीमारियों से निपटने की क्या व्यवस्था की गई है?

नैनीताल हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से भी पूछा है कि कोरोना जांच के लिए नई लैब कब तक बन सकती है? ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, रामनगर, नैनीताल में टेस्ट की सुविधा कब मिल सकेगी?
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