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छोटा कैलाश-ओम पर्वत के यात्रा टेंडर को लेकर घमासान, हाईकोर्ट ने धामी सरकार और KMVN से मांगा जवाब

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दो हफ्ते में सरकार और कुमाऊं मंडल विकास निगम से जवाब मांगा है.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दो हफ्ते में सरकार और कुमाऊं मंडल विकास निगम से जवाब मांगा है.

Chhota Kailash and Om Parvat: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने छोटा कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा का टेंडर गुपचुप तरीके से निजी कम्पनी को देने के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई की है. इस दौरान कोर्ट ने पूछा है कि किन नियमों के तहत यात्रा का टेंडर दिया गया है.वहीं, दो हफ्ते में सरकार और कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) से जवाब मांगा है.

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नैनीताल. हिंदू धर्म की पवित्र यात्रा छोटा कैलाश और ओम पर्वत को गुपचुप तरीके से निजी कम्पनी को देने पर सवाल उठ रहे हैं. कुमाऊं मंडल विकास निगम द्वारा निजी कम्पनी को यात्रा की बुकिंग का टेंडर देने के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकार सचिव टूरिज्म और कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) के साथ जीएम और एमडी को नोटिस जारी किया है. हाईकोर्ट ने इन सभी पक्षकारों को 2 हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है. इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ ने की है.

हाईकोर्ट ने पूछा है कि किन नियमों के तहत यात्रा का टेंडर दिया गया है. दरअसल कुमाऊं मंडल विकास निगम ने 8 सालों के लिये 15 मार्च 2022 डिवाइन मंत्रा प्राइवेट लिमिटेड को यात्रा संचालन का ठेका दे दिया था. इसके तहत इस कम्पनी को आदी कैलाश और ओम पर्वत यात्रियों को भेजने की अनुमति टूर ऑपरेटर को दे दी, लेकिन इस दौरान सभी सुविधाएं यानी रहने से लेकर खाने तक की व्यवस्था कुमाऊं मंडल विकास निगम को करनी होगी. साथ में कंपनी को कुमाऊं मंडल विकास निगम के लोगों को लगाने की अनुमति भी दी गई है.

जानें कैसे उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंचा मामला
इस टेंडर को एनटीपी टूरिज्म अफेयर्स प्राइवेट लिमिटेड ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा है कि बिना किसी टेंडर या विज्ञापन के उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियामावली 2017 का उलंघन करते हुए ये टेंडर गुपचुप तरीके से कम दामों में दिया गया है. याचिका में कहा गया है कि इस गुपचुप अनुबंध के द्वारा कम्पनी को लाभ पहुंचाया जा रहा है और सरकारी खजाने नुकसान दिया जा रहा है. याचिका में कहा गया है कि धारचुला से धारचुला की यात्रा में कम्पनी 50 हजार चार्ज कर रही है. जबकि सभी सुविधाएं केएमवीएन से लेने के बाद सरकारी खजाने में मात्र 8600 रुपये ही मिल रहे हैं. वहीं, काठगोदाम से काठगोदाम की यात्रा में सरकार को 56 हजार के मुकाबले 12400 ही मिल रहा है. इसके अलावा आरोप है कि केएमवीएन ने आम यात्री के लिए बुकिंग को बंद कर दिया है और डिवाइन मंत्रा से ही बुकिंग कराने को बाध्य किया जा रहा है. याचिका में 15 मार्च के अनुबंध को निरस्त करने की मांग के साथ दोबार टेंडर के जरिये यात्रा के संचालन की मांग की है.

Tags: Uttarakhand Government, Uttarakhand high court, Uttarakhand news

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