Lockdown अवधि की स्कूल फीस माफी पर हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार पर छोड़ा फैसला
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Lockdown अवधि की स्कूल फीस माफी पर हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार पर छोड़ा फैसला
राज्य बीजेपी के एक नेता और वकील ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर स्कूलों से लॉकडाउन अवधि के दौरान की स्कूल फीस नहीं लिए जाने की मांग की थी

हाईकोर्ट ने याचिकाओं को अंतिम रुप से निस्तारित (रद्द) करते हुए स्कूलों को आदेश दिया कि जो भी उनकी मांग है फीस (School Fees) को लेकर उस पर एक हफ्ते के भीतर सचिव शिक्षा को अपना प्रत्यावेदन देंगे. कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब तक शिक्षा सचिव इस पर अपना निर्णय नहीं ले लेते तब तक 12 मई का हाईकोर्ट का आदेश लागू रहेगा

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नैनीताल. ऑनलाइन क्लास (Online Class) के नाम पर स्कूलों की चल रही लूट पर उत्तराखंड हाईकोर्ट (Uttarakhand High Court) ने अब सरकार के पाले में ही गैंद डाल दी है. बुधवार को हाईकोर्ट ने याचिकाओं को अंतिम रुप से निस्तारित (रद्द) करते हुए स्कूलों को आदेश दिया कि जो भी उनकी मांग है फीस (School Fees) को लेकर उसको लेकर एक हफ्ते के भीतर सचिव शिक्षा को अपना प्रत्यावेदन देंगे. जिसके बाद 22 जून तक सचिव शिक्षा उस प्रत्यावेदन का निस्तारण करेंगी. कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया कि जब तक शिक्षा सचिव इस पर अपना निर्णय नहीं ले लेते तब तक 12 मई का हाईकोर्ट का आदेश लागू रहेगा.

क्या कहता है 12 मई का हाईकोर्ट का आदेश

दरअसल हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए 12 मई को ई-मेल, मैसेज और वॉट्सएप पर अभिभावकों से फीस मांगने पर रोक लगा दी थी. साथ ही ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को इसमें नोडल अधिकारी बना दिया था. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि स्कूल सिर्फ ट्यूशन फीस ही ले सकते हैं. कोर्ट ने नोडल अधिकारियों को कहा था कि अगर अभिभावकों की कोई शिकायत आती है तो उस पर कानूनी कार्रवाई करें. हालांकि इस आदेश के खिलाफ कुछ स्कूल सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे मगर उनको वहां भी राहत नहीं मिल सकी.



क्या है पूरा मामला
दरअसल राज्य के स्कूल ऑनलाइन क्लास के नाम पर फीस के लिये अभिभावकों पर दबाव डाल रहे थे. इस पर बीजेपी के नेता कुंवर जपिंदर सिंह और वकील आकाश यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर तीन महीने की स्कूल फीस को माफ करने की मांग की थी. याचिका में कहा गया कि स्कूल लगातार फीस के नाम पर अभिभावकों पर दवाब डाल रहे हैं और ऑनलाइन क्लास के नाम पर वॉट्सएप पर काम भेज रहे हैं. याचिका में कहा गया था कि यूकेजी से कक्षा पांचवीं तक के बच्चों को जब ऑनलाइन क्लास ही नहीं दी जा रही है तो उनसे कैसे फीस ली जा सकती है. लिहाजा स्कूलों को फीस न मांगने का आदेश दिया जाए.
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